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बालकनी के उस पार

बालकनी के उस पार

राजेश टैरेस पर सुबह ७ बजे कसरत करने रोज आता है. उसकी कसरत करने कि बचपन से ही आदत रही है. उसकी हाईट और गठीला बदन इसके गवाह है. रोज एक घंटे कसरत करना फिर आधा लीटर दूध पीना और बादाम चबाना. इसके एक घंटे बाद भीगे चने खाना. सांड जैसी ताकत का मलिक बन चुका है. बी.कोम फाईनल ईअर का स्टुडेंट है. साथ में कोल्लेज में शरीर - शौर्य प्रतियोगिता में फर्स्ट प्राइज जीत चुका है.

राजेश का मकान एक कालोनी में एक साईड पर है. कालोनी में करीबन २५ मकान और है. राजेश के मकान के बगल से ट्रेन लाइन गुज़रती है. उसके मकान के बाद कालोनी खतम हो जाती है. उसके पड़ोस के मकान में जो फेमीली रहती है वह काफी छोटी फेमीली है. इस मकान में एकता अपने मा-बाप के साथ रहती है. एकता भी उसी कोल्लेज में बी.कोम फाईनल ईअर कि स्टुडेंट है.

एकता काफी सुन्दर और भरे बदन वलि है. उसे जो एक बार देखे तो देखता जाये. बड़ी -बड़ी आँखें, सुरीले होठ, गोल-गोल चिकने गाल, लम्बी मगर ज्यादा नहीं गर्दन, भरे-भरे सीने, पतली कमर, हल्की भरी हुई जाँघें. ऐसा है उसका रूप. उसकी नजर हमेशा बालकनी में पड़ते राजेश पर टिकी हुई रहती है. राजेश के कसरती बदन कि दीवानी है वों.

एकता की एक सहेली है श्रुति. श्रुति बचपन से ही बगैर बाप के अपनी मा के साथ दूसरी कालोनी में रहती है. श्रुति और एकता के बीच काफी जमती है. श्रुति काफी बिंदास किस्म की और कामुक लड़की है. ब्लू फिल्मे देखना, डिल्डो से अपनी प्यास बुझाना, फ्रिएंडस के साथ डेटस पर जाना. यही आदतें उसे काफी मोर्डन बन चुकी है. उसके इसी बिंदास - पन कि वजह से एकता उसकी और आकर्षित हुई थी. श्रुति के साथ काफी ब्लू फिल्मे देख चुकी थी. दोनों जब ब्लू फिल्मे देखती तब अपनी प्यास आपस में चूमा – चाटी करके और डिल्डो का प्रयोग करके बुझाती थी.

हालांकि श्रुति चाहती थी कि एकता भी न्यू-न्यू बोएफ्रेंड बनाके जिंदगी का मौज मजा लेवे, लेकिन एकता कि हिम्मत नहीं होती थी. उसके फादर कोल्लेज में प्रोफेसर है. उसे मालूम था कि अगर कोल्लेज में किसी को बोएफ्रेंड बनाया तो उसके बाप को मालूम चल जायेगा. लेकिन श्रुति कि संगत में रहकर उसके जिस्म कि भूख बढ़ने लगी थी. इसी दौरान उसका ध्यान राजेश कि तरफ गया. राजेश एकता कि नजर में काफी हैंडसम लड़का था. वों उस पर डोरें डालने के लिये हमेशा अपनी बालकनी में घूमती रहती थी. राजेश कि नजर में भी ऐसा आ चुका था.

लेकिन उसकी हिम्मत नहीं होती थी एकता से बात करने की. आग दोनों तरफ लगी हुई थी लेकिन दोनों ने अभी तक एक बार भी बातचीत नहीं की.

हर दिन राजेश टैरेस पर कसरत कर रहा होता है तभी एकता भी अपने मकान के टैरेस पर पहुंच जाती है. राजेश को कसरत करते देख वों अपनी टैरेस पर टहलने लगती है. उसकी चेष्टा यही रहती है कि कैसे भी राजेश कि नजर उस पर पड़े. अपने जिस्म कि नुमाइश करने के लिये अपनी छाती को अकड़ कर चलती है. जिससे एकता के बूब्स काफी बहर तन जाते है. राजेश अपनी कसरत करते हुए उसके तने हुए और धके हुए बूब्स को ललचती नजर से देखता है फिर वापस अपनी कसरत में लगा जत है. राजेश के गथिले बदन को देखते हुए एकता उसको ललचाई नजर से देखती रहती है. कसरत खतम होने के बाद राजेश अपनी बालकनी में दूध, बादाम और चने खाने के साथ पढ़ाई करने बैठा रहता है. एकता कपड़े सूखाने के बहने बालकनी में जो कि राजेश कि बालकनी के ठीक सामने है पहुंच जाती है. दोनों कि बालकनी में मुश्किल से १० फीट का फासला होगा.

कपड़े सुखाते समय अपने कपड़े को थोड़ा नीचे खिंच कर अपने उभारों को उपर से दिखाना, नीचे झुककर अपनी गर्दन से झांकते उभारों को प्रदर्शित करना और टेबल पर खड़ी हो कर अपनी टाँगों से आधी जाँघों तक का बदन दिखाना. यही उसका रोज का काम हो गया. राजेश भी उसके आधे दिखते उभारों और अधि दिखती जाँघों को देख कर एकता कि तरफ आकर्षित हो चुका लेकिन कभी इससे आगे बढ़ने कि हिम्मत नहीं हुई. कई दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा.

एक दिन टैरेस से एकता वापस आयी तो उसके फादर और उसकी मा गाँव जाने कि तैयारी कर रहे हैं. कोई अर्जेंट काम आ गया है. मा को चिंता हो रही थी कि २ दिन एकता कहन रहेगी. लेकिन प्रोफेसर ने कहा,

‘एकता अब कोई छोटी बच्ची नहीं है. अकेली रह सक्ति है.’

मा बोली, ‘लेकिन कोई न कोई साथ रहना चाहिये ही.’ एकता ने कहा,

‘ठीक है. मैं अपनी फ्रिएंड श्रुति को बुल लेती हून. वों रह जायेगी मेरे साथ.’

प्रोफेसर श्रुति को जानता था. हालांकि उसके चाल-चलन के बारे में नहीं जानता था. उसने हामी भर दी. ओर गाँव कि और दोनों निकल पड़े. रास्ते में ही श्रुति का घर था. वहन रुक कर श्रुति और उसकी मा से मिल. उसकी मा को बताया,

‘हम लोग गाँव जा रहे है. घर पर एकता अकेली रहेगी. अगर आप श्रुति को हमारे घर २ दिन के लिये भेज दे तो बड़ी मेहरबानी होगी आपकी.’ श्रुति कि मा ने कहा,

‘कोई तकलीफ नहीं है भाई साहब. २ दिन श्रुति वहीं रहा लेगी एकता के साथ. जब तक आप नहीं आयेंगे तब तक श्रुति वहीं रहेगी.’ एकता का बाप धन्यवाद देते हुए अपने घर के मेन गेट कि चाबी श्रुति को देते हुए बोल,

‘चाबी मैं भूल से लेकर आ गया हू. यह चाबी लेकर चले जाना. मगर तुम दोनों ध्यान रखना अपना -अपना.’ ओर यह कह कर अपने गाँव निकल गये. श्रुति चाबी को अपनी जींस कि जेब में डाल कर आने वाले समय कि प्लन्निंग करने लगी. व्क्ड प्लयेर तो एकता के घर में था नहीं. सिर्फ डिल्डो को ही अपने साथ ले जा कर एकता के साथ २ दिन तक मजे लूत सक्ति है, ऐसा सोच कर एकता के घर में जाने कि तैयारी करने लगी. तभी श्रुति कि मा बोली,

‘२-३ घंटे बाद चली जान. अभी थोड़ा काम है यहाँ पर.’ उधर एकता अपने मा और बाप के जाने के बाद बाथरूम में घुस गयी. शोवर के नीचे बैठे -बैठे अकेले श्रुति के साथ रहने कि कल्पना ने उसे काफी रोमांचित कर दिया. ऐसी ही कल्पना में खोई हुई थी कि उसके हथ अपने आप बदन को सहलाने लगे. अपने बूब्स को खुद रगड़ने लगी. अपनी झाँटो को सहलाने लगी. अपनी चूत में अँगुली डालने लगी. पूरे बदन में काम-वासना हिलोरे मारने लगी. उसका सर जिस्म ठंडे पानी के शोवर के नीचे बैठा-बैठा जलने लगा. चूत में अँगुली करते हुए उसके मुँह से सिस्करियन निकल रही थी. तभी राजेश का ख्याल उसके दिमाग में आय.

झटके से उठी और गीले ही बाथरूम से निकल कर बालकनी कि और चल पड़ी.

हाल में पहुँचते ही उसे ध्यान आय कि उसके जिस्म पर एक रेशा भी नहीं है. अपने आप को ऐसी हालत में देखकर खुद अपने आप पर हँसने लगी. चाहत में इतनी पागल कभी नहीं हुई. वापस बाथरूम में गयी और एक बाथ -गाउन अपने बदन पर डाल साथ में कुछ गीले कपड़े सूखाने के लिये ले लिये.

सामने बालकनी में राजेश बैठा पड रहा था. राजेश ने उसके मम्मी और पापा को समन के जाते हुए देख लिया था. लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि वों लोग गये कहन है.

एकता बालकनी में आकर कपड़े सूखाने का नाटक करने लगी. असल में राजेश को टीज़ करना चाहती थी. कपड़े सूखाने के लिये वों बालकनी कि दीवार कि ओर झुकी जिसके कारण राजेश का ध्यान उस पर गया. लेकिन वापस बूक्स पड़ने लगा. अपनी और उसको ध्यान न देते देख एकता ने पीछे घूम कर बाथ -गाउन को अपने मम्मे के सामने से फैला दिया और वापस दीवार पर झुकी. सामने से गाउन के फैलने से उसके मम्मे दीवार के सहारे लगा गये और उपरि गोलीआँ राजेश को दिखाने लगी. राजेश यह सीन देखकर बावला हो गया. गोरे-गोरे मम्मे के उपरि हिस्से देख कर उसके शरीर में तनाव आने लगा. अब उसने अपनी बूक को अपने सामने रखकर बूक के उपरि हिस्से से एकता के कबूतरों का नयन-सुख लेने लगा.

एकता थोड़ी देर तक ऐसे ही खड़ी रही. हालांकि वों खड़ी खड़ी नीचे से अपनी हथेली का दबाव बढ़कर अपनी गोलोयिओन को उपर कि और धकेल रही थी. जिससे उसके मम्मे आधे हिस्से तक राजेश को दिखने लगे. राजेश कि कै दिनों कि मुराद पूरी हो रही थी. फिर एकता दीवार से हटने के पहले अपने बथ-गोव्न कि डोरी को खोल दिया. जैसे ही वों दीवार से हटी उसके पूरे मम्मे एक झलक दिखा कर राजेश कि और उत्तेजन को बड़ा दिया. उस एक झलक में राजेश कि अंखोन ने एकता के मम्मो कि पूरी झलक देख ली.

एकता यही नहीं रुकी. एक टेबल को खिसका कर बालकनी के उपरि हिस्से में कपड़े सूखाने खड़ी हुई. टेबल पर खड़ी हो जाने से उसका चेहरा राजेश को नहीं दिखा पद रहा था लेकिन उसकी मांसल जाँघें जरूर दिखने लगी. एकता खड़ी खड़ी राजेश के उलटी तरफ घूम कर अपने बथ-गोव्न को थोड़ा उपर सरका लिया. ग़ोव्न के उपर सरकने से उसकी टाँगे और अधि से ज्यादा जाँघें राजेश को दिखने लगी. उसके तन-बदन में आग लगा गयी. तभी एक धमक हुआ. एकता ने घूम कर बथ-गोव्न को उपर हटा कर अपनी चूत कि झलक राजेश को दिखा दी. राजेश के लिये यह बहुत बद धमक था. उसकी अंखोन ने आज पहली बार किसी कि चूत को देख था. चूत देख उसका लन्ड फनफना उठा. बूक्स उसके हथ से गिर पड़ी. होठ सूखने लगे. अपनी अंखोन पर उसे यकीन ही नहीं हो रहा था. बूक के नीचे गिरने का सीन देखकर एकता कि हंसी छूट गयी और वों राजेश कि तरफ मुस्कराती हुई अपने रूम में चली गयी.

राजेश हक्काबक्का होकर कै देर तक यूहि बैठा रहा. उसे अबतक यकीन नहीं हो रहा था कि वाकई में उसने एकता कि चूत देखी थी. उसका लन्ड उछल-उछल कर इसकी गवाही दे रहा था कि चूत के दर्शन हुए थे. फिर उसके दिमाग में एकता ही घुस गयी. बूक्स को साईड में रखकर एकता के सपने देखने लगा. कुछ सोच कर खड़ा हुआ और कपड़े पहन कर अपने मकान से निकला.

एकता के मेन गेट कि घंटी बजी. एकता उस समय राजेश कि बौखलाहट के सीन का मजा लेकर अपने रूम में बाल बन रही थी. उसी बथ-गोव्न में गेट खोलने चली. उसका अंदाजा था कि श्रुति आयी होगी. इस लिये उसने कपड़े बदलने जरूरी नहीं समझे. गेट खोला. सामने राजेश खड़ा था. राजेश को देख वों एकदम से हडबडा उठी. उसने सपने में ही नहीं सोच था कि राजेश इतनी हिम्मत कर उसके घर आ जायेगा. मुस्कराते हुए बोली,

‘बोलिये क्या चाहिये?’

‘जी मैं मैं जी .’,राजेश खुद भी हडबडा रहा था.

‘हान .. हान बोलिये?’

‘जी मैं .. जी’

‘यह जी जी क्या कर रहे हो? बोलिये कौन चाहिये, ‘एकता ने कहा. साथ ही मन ही मन सोच रही थी कि बोलों न और भी देखना है.

राजेश के मन में आय कि बोल दे तुम्हारी जवानी चाहिये. फिर बोल दिया, ‘जी क्या मुझे थोड़ा दूध मिल सकता है?’

एकता मन ही मन सोच कि मम्मे देखकर दूध याद आय है. फिर कहा, ‘हान क्यों नहीं. आइये अन्दर आइये’

राजेश उसके घर में घुस और बोल, ‘मेरा दूध फट गया है. चाय बनाना है. मेहरबानी करके थोड़ा दूध दे दिजिये.’

एकता मन ही मन सोच कि दूध तो क्या पूरी दूध कि फैक्टरी ही हवाले कर दु. एक बार कहो तो सही. फिर बोली, ‘कितना चाहिये?’

राजेश कि हद्बदहत अभी तक खत्म नहीं हुई थी. उसी हद्बदहत में बोल, ‘जी . दूध चाहिये.’ फिर ध्यान आय कि कितना चाहिये यह पूछ रही तो वापस बोल, ‘जी एक कुप चाय बने उतना.’

‘सिर्फ एक कुप चाय के लिये ही.’

‘जी घर में कोई नहीं है. चाय कि तलब लगी है. देखा तो दूध नहीं है.’

‘घर में आज कोई नहीं है क्या?’

‘जी, सब बहर गये हैं. अब शाम को ही लोटेंगें.’

एकता फिर पूछी, ‘तो कितना दूध दून एक कुप के लिये.’

‘एक गिलास लगा जाता होगा एक कप में?’

एकता मन ही मन सोच कि इसे चाय बनाना आता नहीं है. फिर भी पूछ, ‘अगर चाय बनानी नहीं आती है तो बेठीये मैं बना देती हू.’

राजेश कि मन कि मुराद पूरी हो रही थी. जिसके ख्याल में खोया हुआ था वहीं चाय का ओफर कर रही है. शायद बाद में और कुछ भी ओफर करे. फिर भी बोल, ‘जी आप क्यों तकलीफ उठती है. मैं घर पर पी लूंगा.’

एकता मुस्कराते हुए पूछी, ‘आप को चाय बनानी आती है?’

राजेश फंस गया. उसे कहना पद, ‘जी आती तो नहीं है.’

एकता ने उसका हथ पकड़ कर सोफे पे बैठाया और बोली, ‘इसमें क्या बड़ी बात है. आइये आज में आपको चाय बनाना भी सिखाती हून.’ एकता के भी मन कि मुराद पूरी हो रही थी. लेकिन अपने जज़बात को दिखाना नहीं चाहती थी.

राजेश उसके हथ का स्पर्श पा कर मदहोश हुआ जा रहा था.

एकता के पीछे पीछे वों भी किचन में घुस गया. एकता उसको चाय बनाना का तरीका बताने लगी. राजेश का ध्यान चाय सिखने में नहीं बल्कि एकता के बदन कि महक पाने में था. उसके बदन कि महक राजेश को मस्त कर रही थी. चाय बनाना के कारण २-३ बार एकता का बदन राजेश के बदन में तक्र गया. आपस में बदन टकराने कि वजह से दोनों के बदन में करंट दौड़ रहा था. लेकिन पहल न राजेश कर रहा था न ही एकता कर रही थी.

चाय बन्ने के बाद एकता और राजेश दोनों हाल में आ गये. दोनों ने चाय पी. चाय पीते -पीते दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, महसूस कर रहे थे. फिर राजेश उठा खड़ा हुआ और गेट कि तरफ बढ़ने लगा. लेकिन मन ही मन सोच रहा था कि इतनी मेहनत करने के बाद कुछ भी हासिल नहीं हुआ. फिर मन में आय, अरे पागल, पहल तो खुद करेगा य एकता करेगी. चल तू खुद पहल कर.

ऐसे विचार से उसके मन में थोड़ी हिम्मत आयी. एकता के मम्मी और पापा घर में नहीं है ये जानकारी होते हुए भी वापस घूम कर पूछ,

‘क्या बात है? घर में कोई नहीं है.’

एकता मन ही मन सोच कि मुझ से मिलने आय है कि किसी दूसरे से. फिर भी बोली, ‘नहि, सब गाँव गये है.’

‘अकेली ही घर में हैं आप.’

एकता ने सोच कि अकेली होने का मालूम पड़ने पर शायद उसकी हिम्मत बंधे सो कहा दिया, ‘१-२ दिनों में आयेंगे सब.’

यह सुन कर वास्तव में राजेश कि हिम्मत बंध गयी, ‘आप को अकेले रहते हुए डर नहीं लगता?’

एकता के मुँह से निकल पद, ‘आप जो है.’ फिर बात को सम्भल्ते हुए बोली,

‘जी मेरा मतलब है कि आप लोग है न पड़ोस में.’

अपना होश सम्भल्ते हुए राजेश बोल, ‘आप तो रोज टैरेस पर आती है.’

‘आप भी तो रोज टैरेस पर कसरत करते है. मैं रोज आपको देखती हून.’

‘जी हान. मैं भी रोज आपको देखता हून.’

एकता पूछ बेठी, ‘रोज मैं तो आपको कसरत करते हुए देखती हून लेकिन आप मुझे क्यों देखते है.’

ऐसे सवाल कि राजेश को कोई उम्मेद नहीं थी. वों अच्कच गया. फिर कह दिया, ‘मालूम नहीं क्यों? लेकिन जब भी आपको टैरेस पर देखता हून तो आपको देखता ही रहता हून.’

एकता थोड़ी शर्माते हुए बोली, ‘ऐसी क्या खास बात है जो मुझे ही देखते रहते है.’

कुछ जवाब न सूझते देख राजेश ने आखिर डरते डरते कह दिया, ‘आपके नर्म, मुलायम, गुलाबी होठों कि वजह से.’

अपनी प्रशंसा को सुन कर एकता थोड़ी लजाती हुई बोली, ‘ऐसी क्या खास बात है मेरे होठों में?’

एकता को नाराज न होते देख राजेश कि हिम्मत बड़ गयी. उसके मन में आय कि आग दोनों तरफ बरबर लगी हुई है. बस पहल करने कि देरी है. उसने थोड़ा आगे बढ़ते हुए कहा,

‘आप को नहीं मालूम. लेकिन आपके होठ मेरे होश उड़ा देते है.’

‘चलो, ऐसे ही कहा देते हो य ‘

‘यह तो मेरे दिल से पूछिये.’

एकता उसकी अंखोन में झोंकती रहती है. यही हाल राजेश का होता है. उसकी अंखोन में झँकाता हुआ कब एकता के करीब आ गया मालूम ही नहीं पड़ा. दोनों के बीच केवल इंचेस में फासला रहा गया. दोनों कि साँसे टकराने लगी. तभी दोनों मनो नींद से उठे हो थोड़े अलग हो गये. लेकिन राजेश यह मौका गंवाना नहीं चाहता था.

वों एकता कि खुशामद करते हुए बोल, ‘प्लीज, एक बार इन होठों को चूमने दो.’

एकता थोड़ा नाराज होने का नाटक करती हुई बोली, ‘यह क्या कह रहे हो तुम.’

राजेश ने फिर गुजारिश कि, ‘प्लीज, एक बार. फिर नहीं कहूँगा.’

एकता भी थोड़ा न-नकुर के बाद रजामंद हो गयी लेकिन एक शर्त पर. शर्त यह थी कि राजेश उसके बदन के दूसरे कोई हिस्से को नहीं छुएगा. इस पर राजेश ने भी एक शर्त रख डाली कि अगर मेरे होठों को अलग करने कि चेष्टा कि तो तुम्हारी शर्त खत्म हो जायेगी. फिर अगर राजेश बदन के किसी हिस्से को छू भी दे तो नाराज नहीं होगी.

दोनों शर्त लगा कर खड़े हो गये. राजेश ने कोई जल्दबाजी नहीं करते हुए एकता कि अंखोन में झांकना शुरु कर दिया. एकता भी उसकी अंखोन में खो गयी. दोनों एक दूसरे को निहारते हुए कब चुम्बन लेने लगे दोनों को ही मालूम नहीं पडा.

राजेश एकता को अपनी बाँहों के घेरे में लेकर उसके होठों का रस पीने लगा. अपने होठों से उसके होठों को रगड़ कर उसकी गुलाबी पंखुदियोन का रंग चुर रहा था. अपनी जीभ उसके मदक होठों पर फेर रहा था. अपनी हाथों का दबाव उसकी कमर पर दाल कर एकता को और अपने नजदीक ले रहा था. एकता को ऐसे चुम्बन से बहुत मजा आ रहा था. वों भी उसकी बाँहों में अपने आप को ज्यादा शकुन से महसूस कर रही थी. राजेश कि चेस्ट में बँधती जा रही थी.

राजेश ने चुम्बन के साथ अपने एक हथ से उसके बथ-गोव्न में छिपे उसके कबूतर को टटोलने लगा. एकता ने कसमसा कर विरोध किया. लेकिन राजेश अब मानने वाला नहीं था. उसने अपने दूसरे हथ से उसकी कमर पर घेर बनाये हुए उसे छूटने नहीं दिया. राजेश ने उसके मम्मे पर अपने हथ से छेड़ -छाड़ जारी रखी.

फिर एक समय ऐसा अय कि एकता का मम्मे बथ-गोव्न से निकल कर बहर आ गये. तब तक एकता को भी अपने मम्मे छिड़वाना में मजा आने लगा. अब वों कोई विरोध नहीं कर रही थी बल्कि मम्मे पर पड़े राजेश के हथ से उसके दिमाग में आनन्द छ रहा था.

राजेश ने अपने हथ से उसके लहराते मम्मे पर अपनी पाँचों अँगुली जम दी. उसके मम्मे गोल-गोल बीच में डार्क ब्रोव्न कलर का निप्पल. अब तक कि छेद-छद से उसके निप्पल कड़क हो चुके थे. उसने एकता कि पीठ अपनी तरफ कर उसके दोनों मम्मो को अपने हथ में थाम लिया. लगा मसलने उन्हें.

‘ऑह्ह्ह्ह’ एकता आनंद भरी सिसकारी लेने लगी.

दोनों बूब्स को हथ में लेकर राजेश उनसे खिलवाड़ करने लगा. उसकी चूची को अपनी उंगलियों के बीच में लेकर दबाने लगता. जब जोर ज्यादा लगता तो ‘आह्ह्ह’ भरी सिसकारी एकता के मुँह से निकल पड़ती.

राजेश ने अब एक हथ उसके मम्मे पर रख और दूसरा हथ उसके पेट पर से सरकता हुआ नीचे सरकने लगा. नीचे सरकता हुआ उसका हथ एकता कि रेशमी झाँटो पर पहुंच गया. मख़मली झाँटो को छेड़ने में राजेश को भरपूर मजा आ रहा था. एकता कि चूत अपने नजदीक राजेश के हथ को पा कर झनझना उठी. लेकिन राजेश ने कोई जल्दी नहीं करते हुए उसकी झाँटो में ही अपना हथ फंसाये रख. दूसरे हथ से उसके मम्मो के साथ खेल रहा था. फिर राजेश ने एकता को वापस अपनी और घूम लिया और झुकते हुए उसके एक मम्मे पर अपने गरम जलते हुए होठ रख दिये.

‘स्स्स्स्स्स्’ सिसकारी लेती हुई एकता अपने को सम्भाल नहीं पायी. उसने अपना एक हथ राजेश के सिर पर रख दिया.

राजेश अपने होठों से उसके मम्मे को चाटता रहा. जैसे जैसे राजेश उसके मम्मे को चाट रहा था वैसे- वैसे एकता के हथ का प्रेस्सर राजेश के सिर पर पड रहा था. राजेश अपने घुटने पर बैठ गया और उसके दोनों मम्मो को बारी -बारी से चाटने लगा. अपनी जीभ निकाल कर उसकी निप्पल को चाट रहा था. कभी अपने होठों के बीच उसकी निप्पल को लेकर दब देता. एकता के मुँह से निकल पड़ा,

‘चाटो राजेश इन्हें जी भर के चाटो . तुम दूध लेने आये थे . लो मैंने अपनी दूध कि पूरी फैक्टरी तुम्हारे हवाले कर दी चाटो मेरे बूब्स . को . अह्ह्ह बड़ा मजा आ रहा है मेरे निप्पल को दबाओं चाटो चूसो मेरे ऋज् एश ‘

काफी देर तक उसके मम्मो को चाटने और चूसने के बाद राजेश उठ खड़ा हुआ और उसके गालों और होठों को चूमने लगा. एकता भी चुमवाती हुई अपने हथ को बढ़कर उसकी पेंट कि जिप और बटन खोल दी. इससे राजेश कि पेंट सर करती नीचे खिसक गयी. फिर राजेश ने अपने हथ से ही अपना उन्देर्वेअर नीचे कि और धकेल दिया. उन्देर्वेअर के नीचे जाते ही उसका लौड़ा उछल कर एकता के हथ में आ गया. लम्बा और मोटा, पेर्फेक्त लन्ड एकता के हथ में आते ही और उछलकूद मचानें लगा.

एकता ने उसके लन्ड को खड़े खड़े ही हथ में थाम कर कहा, ‘तुम्हारा लन्ड बहुत सख्त हो गया है’, और फिर उस पर अपनी अँगुली फेरने लगी. उसके चिकू को अपने हाथों में भरकर सहलाने लगी.

राजेश कि चूमा चाटी उसके गालों पर इससे बड़ गयी. तभी एकता अपने घुटनों के बल बैठ कर उसके लन्ड को अपने होठों से सटा लिया. अपने बन्द होठों पर उसके मूसल लन्ड से अपनी मसाज करने लगी. राजेश का लन्ड एक दुम गरम था. उसकी गर्मी से अपनी मसाज कर एकता अपने खून कि गर्मी को ओर बड़ा रही थी. फिर अपनी जीभ निकाल कर उसके लन्ड को उसकी जड़ से लेकर उसके सुपाडे तक चाटने लगी. एकता को मानो एक जिंदा बांसुरी मिल गयी हो. उसकी बांसुरी में अपनी राग छेड़ने लगी. अपनी जीभ से उसके चिकू और उसके केले को चख रही थी.

फिर अपने होठों को खोलकर राजेश के लन्ड को मुँह में ले लिया. लंड के मुँह में जाते ही राजेश के बदन का पूर लहू मानो उसके लन्ड में ही समा गया. एकता मुँह में लेकर अपने सिर को हीला-हीला कर उसके मस्त, मोटे और लम्बे लन्ड को चूसने लगी. उसकी इस चुसाई से राजेश ने अपने दोनों हाथों से उसका सिर पकड़ लिया और अंख बन्द कर उसकी इस लन्ड- चुसाई का मजा लेने लगा. राजेश के बदन का तनाव बढ़ता जा रहा था. उसकी सिस्करियन इसकी गवाह थी,

‘है. मेरी रानी चूसो मेरे लंड को बहुत .. दिनों का भूख है. इसे जी भर के चूसो आज मेरे लन्ड को चूस चूस कर मुझे पागल कर दो मेरी रानी ‘ ऐसा कहता जा रहा था और उसके सिर को थाम अपने लन्ड को हिलाने लगा.

एकता ने भी उसका जवाब देते हुए कहा, ‘अब मैं तुम्हारे लन्ड को जोर जोर से मुँह में ले कर चूसून्गि.. इसके लिये कब से तड़प रही थी. इस चोदू लन्ड का रस पी कर ही मेरी प्यास बुझेगि’

लन्ड को एकता के मुँह में लगातार पेल रहा था. जब उसे लगा कि ऐसे ही पेलता रहा तो उसका पानी निकल जायेगा तो झटके से बहर निकल एकता को सीध खड़ा कर दिया और उसका बथ-गोव्न को निकल फेंक. अब उसके सामने उसकी चूत थी. नीचे बैठा कर एकता कि दोनों टाँगों को थोड़ा फैला दिया और अपनी जीभ दे दी उसकी चूत में. अपनी जीभ से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा. चूत के दाने पर राजेश कि जीभ के लगते ही सिस्करियोन कि बाढ़ आयी. एकता को अपनी टाँगों पर खड़े रहने में तकलीफ होने लगी. राजेश कि जीभ उसकी चूत में ज कर उसको पागल कर दी.

‘राजेश . ओह्ह्ह . उफ्फ्फ्फ्फ्फ . चाटो चूसो.. मेरी चूत. चाटो . इस लिये तो तुम्हें आज सुबह दिखाया था. मेरे रज. चाटो मेरी चूत . का पूर रस पीकर इसे अपनी जीभ से . अह्ह्ह . उफ्फ्फ . रगड़ों . मेरे रज. चूसो उफ्फूओ आह हाइ हाअन येआ येअह येअह चाट जाओ मुझे जुस्त एअत में ‘ ऐसी सिस्करियन लेती हुई एकता अपनी चूत को ठेलते हुए राजेश को जमीन पर सुला दिया और उसके मुँह पर अपनी चूत रगड़ने लगी. अपनी चूत को जोर जोर से राजेश के मुँह पर रगड़ रगड़ कर बोली,

‘खा जाओ मेरी चूत को आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह पीईईई जाआआअओ मेरी चूऊत काअ रस.’ जब चूत कि चुसाई एकता को और सहन नहीं हो रही थी तो राजेश के मुँह के पास अपना मुँह ले जा कर फुसफुसा कर बोली,

‘अब क्यों देर कर रहे हो. अब मत तरसाओ मुझे . क्यों तड़पा रहे हो चलो अब चोदो मुझे. अपने लन्ड को मेरी चूत में डाल कर जोर-जोर के धक्के मारो. मेरी चूत कि खाज मित दो … अब दाल भी दो.’

लेकिन राजेश ने उसकी चूत को चूसना चालू रख. उसकी चूत को जीभ से चोद रहा था. लेकिन एकता को अब सहन नहीं हो रहा था. वों तो चाहती थी अब राजेश अपने लन्ड को उसकी चूत में पेल कर उसकी चूत कि भरपूर चुदाई करे. वों फिर राजेश से बोली,

‘अब बर्दाश्त नहीं. होता . राजेश .. अपना लन्ड मेरी चूत मैं पेल दो.. मुझे पीछे से घोड़ी बना कर चोदो’

राजेश अब खुद बेसब्र हो चुका था. उसने एकता को नीचे बैठा कर सोफे के सामने घोड़ी बना दिया और अपने लन्ड को चूत के लिप्स के बीच फंस दिया. फिर उसकी गर्दन थाम कर अपने चुतड़ उठा कर अपने लन्ड का एक जोर का धक्का दिया. लन्ड सीध उसकी चूत में जा कर फंस गया. लन्ड के अन्दर जाते ही वह चिल्लाने लगी,

‘’ओह्ह्ह ऊऊह्ह आअऊऊछ्ह्ह.. श्हीईए… मा…… ऊऊऊऊऊ स्स्स्स्सीईईए’’ कह कर एकता ने जोरदार सिसकारी ली.

फिर राजेश ने अपने लन्ड का जो धक्का लगन शुरु किया कि एकता कि रूह काँप गयी.

‘ऑऊओह्ह्ह थोड़ा धीरी आहिस्ता से प्लेअसे दर्द हो रहा है अह् औच’ कहते हुए राजेश को थोड़ा धीम करने कि कोशिश कि.

राजेश का बदन ऐसे ही कसरत करते हुए पहलवान का था. उसे कोई इतना जोर नहीं आ रहा था. वहीं एकता आज तक केवल डिल्डो से ही अपनी चुदाई कि थी. मोटे, पतले, लम्बे हर तरह के डिल्डो का प्रयोग करने के कारण उसे कोई तकलीफ नहीं हुई लेकिन डिल्डो अखीर डिल्डो ही होता है और असली लन्ड वों भी एक पहलवान का लन्ड दुसरी बात.

‘चोदो मुझे ऐसे ही चोदो चोदते जाओ. आज पूरी तरह से चोद डालों मुझे. तुम्हारे लन्ड के ऐसे ही झटके. उफ्फ्फ अह्ह्ह धक्के मारो. मेरी चूत तुम्हारा शुक्रिया मानेगी बस तुम मुझे यूहि चोदते जाओ. चोदो मुझे. आखिर मुझे भी कोई पहलवान का लंड मिल. वाह. क्या चोद रहे हो. आह. क्या चोदते हो तुम. चोदो चोदो.. अह्ह्ह्.’ एकता सिसकारी लेकर अपनी चूत को अब ज्यादा मस्ती से चुदवाने लगी.

राजेश भी उसकी सिस्करियन सुन कर और जोश में आ गया. वह ताबड़तोड़ जोर जोर के धक्के मारने लगा. उसके धक्कों कि स्पीड बड़ गयी. साथ ही उसकी भी सिस्करियन निकल रही थी. चोदने कि मस्ती में वों भी धक्के मारते हुए बोल रहा था,

‘’इस वक्त तुझे चूदने में बहुत मजा आ रहा है ले खा मेरा लन्ड ले मजा ले ले सम्भाल मेरे धक्के को तेरी चूत में बड़ी खुजली हो रही है न .. ले आज इसे मिटा ले ‘

एकता भी धक्के धक्के ख ख कर मजे ले रही थी. उसकी चूत कि खाज हर धक्के के साथ बड़ रही थी. अचानक उसे लगा कि चूत में कुछ हो रहा है. उसकी चूत का तनाव उसके दिमाग पर चड़ गया. फिर अपने आप को एक गहरे समुद्र में अपने आप को तैरते पाया. वों राजेश से सिस्करियन लेते हुए चीख कर कहने लगी,

‘ऑओह्ह्ह येस्स्स्स फक्क मी हाअन और जोर से और जोर से और तेज़ फक्क मी मेरे फक्कर ऊओह्ह्ह … चोद … जोर से चोद … और जोर से … मान गयी मैं तेरे लन्ड को मेरी चूत… ओह्ह्ह्ह्ह…चोदो मुझे फाड़ डालों मेरी चूत.. जोर से चोदो यह क्या हो रहा है मेरी चूत में कुछ निकल रहा है . ओह्ह्ह्ह मैं . झड़ रही . हून . झड़ी मैं झड़ी ‘ इतना कह कर वह निढाल हो कर सोफे को थाम कर नीचे सो गयी.

राजेश अभी तक झड़ा नहीं था. उसका लन्ड झडने के लिये बेताब था. अपने बदन को ढीला छोड़कर खुद एकता के जिस्म से लिपट कर सो गया.

१-२ मिनट के बाद जब एकता ने अपनी आंख खोली तो मुस्कराते हुए राजेश कि अंखोन में झांका. एकता के चेहरे पर संतुष्टि के भव था. उसको चुदवाने में कभी ऐसा आनंद नहीं मिल था. अपने हथ को बढ़कर राजेश के लन्ड से खेलने लगी. राजेश का लन्ड अभी भी तना हुआ खड़ा था. उसकी प्यास अभी अधूरी थी.

राजेश ने कहा अब एक दौर और हो जाये.

लेकिन एकता बोली जल्दी क्या है. हमारे पास वक्त ही वक्त है. पहले तुम्हारा पानी निकालो. मैं उसे झड़ते हुए देखूंगि और चखूंगि.

राजेश ने एकता को चित लेत दिया और उसके मम्मे पर जा कर बैठ गया. अपने लवडे को उसके दोनों मम्मो के बीच कि खाई में डाल कर अपने लन्ड को हिलाने लगा. टिट-फक्किंग यानी बूब्स-चुदाई करने लगा. दोनों मम्मो के बीच उसका फंस हुआ लन्ड चूत कि तरह उसकी खाई में पेलने लगा.

२५-३० धक्के लगाने के बाद अपने लन्ड को एकता के मुँह में ठेल दिया. एकता उसके लन्ड को मुँह में दाल कर चूसने लगी साथ ही अपने हथ से उसकी गोतिओन को भी छेड़ रही थी. राजेश का लन्ड अब अपना पानी छोड़ने को तैयार हो रहा था.

‘येस्स् मेरी रानी मेरा लन्ड झडने वाला है. इसको बहर निकालो और अपने बूब्स पर रख कर इसे हिलाती रहो अह्ह्ह क्क्क्क्क . ऑह्ह्ह .मेरा पानी निकला..’ कहते हुए उसके लन्ड कि पिचकारी छूटी.

लन्ड लम्बी लम्बी पीक मारता हुआ अपने वीर्य कि पिचकारी उसके मम्मे और चेहरे पर छोड़ने लगा. ६-७ पिचकारी मारने के बाद जब बून्द-बून्द वीर्य बाहर निकालने लगा तो एकता ने लन्ड को वापस मुँह में डाल लिया. उसकी आखिरी बून्दो को अपनी जीभ पर लेकर टेस्ट करने लगी. फिर उसके ढीलें होते लंड को चाट- चाट कर साफ किया और बेद्रूम में जा कर सो गये.

थोड़ी देर बाद ही दोनों के बदन में वापस वासना कि आग जलने लगी. दोनों अंखे खोले बेड़ पर पड़े एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे.

गांव की छोरी

गांव की छोरी

मेरा नाम ॐ है मैं २१ साल का नौजवान हूँ. मेरी ऊंचाई ५’११” है और पेहेलवानी वाला बदन रखता हूँ. दोसतों यह कीस्सा शुरू होता है वहाँ से जब मैं अपने गांव गया था. गांव में हमारी पुश्तैनी ज़मीन जयदत है. वैसे तो उसके देखभाल के लीये वहाँ हमारे ताउजी हैं पर पापा हर साल गांव जाते थे पर इस साल उनको समय नहीं मीला तो मुझे ही गांव जाना पड़ा.
मैं अपने गांव करीबन पंच साल बाद गया था. गांव में हमारे घर से करीबन बीस कदम दूर ही दीपा का घर था. मुझे बताया गया था की व्हो हमारे बचपन की दोस्त है. जिस दीन हम घर पहुंचे तो हमे मिलाने काफी लोग आ गए जिस्मे की दीपा भी अपने परिवार वालों के साथ ही आई थी. वैसे तो उसे देखते ही मैं उसपे फीदा हो ग्या पर इतने लोगों के बीच मैं उसे ठीक से देख भी नहीं प रहा था .

व्हो पूरी उन्नीस (१९) साल की हो गयी थी. उसका बदन भी पुरा देसी और गदराया हुआ था. वैसे तो वो मुझे देख ही नहीं रहीं थी पर काफी देर बाद हमारी नज़र उसकी नज़र से टकराई और व्हो शर्म गयी.

हमारी Bhabhi (हमारे ताउजी के लड़के की बीवी ) थोड़ी माजाकीया हैं और हमसे कुछ ज्यादा ही मजाक करती हैं. सबके जाने के बाद मैं थोडा अपनी पलंग पे लेट ग्या आराम करने के लीये. मेरी अभी आंख लगी ही थी की मुझे अपने कानों के पास चूड़ी के खनखनाहट की आवाज़ आई मुझे लगा Bhabhi हैं, हमने आंख बंद करके ही कह दिया “एक गिलास पानी पी ली जिए “. फीर ज़ोर से चूड़ी खंकने की आवाज़ आई मैने अपनी आंख खोली तो देखा की दीपा हाँथ में पानी का गिलास और एक हाँथ में एक प्लेट में गूढ़ का टुकडा पड़ा था मैं तुरंत उठ कर बैठ गया. हमने उससे पूछा “आप दीपा हैं क्या”, तो उसने सर हीला दीया और शर्म के सर झुका लीया. मैने कहा “बैठो”, पर वो खाडी ही रही मैने उसका हाँथ पकड़ के उसको बिठाना चाहा पर जैसे ही हमने उसका हाँथ पकड़ने की कोशिश की उसके हाँथ से पानी का गिलास और प्लेट दोनों ही गीर ग्या. तभी अंदर से Bhabhi की आवाज़ आई “क्या हुआ”, Bhabhi दौड़ती हुईं आयीं उन्होने मुझे फटकारते हुए कहा “लगता है तुमने कोई गलत हरकत की है”, तब दीपा ने कहा “नहीं Bhabhi मैं यहाँ रखने जा रहा थे तो खटिया का कोना लग गया”, Bhabhi कहने लागीं ” अभीआये हुए एक दीन भी नहीं हुआ और तू इसकी तरफ़दारी करने लगी”. यह बोल कर Bhabhi ने हमारी तरफ देखते हुए एक अजीब से मुर्कुराहत देते हुए रसोईघर में चली गयीं. दीपा भी जाने लगी तो मैने हाँथ आगे बड़ा दीया जिससे व्हो आगे ना जा सके. हमने उससे माफी मांगी और उसे फीर से बिनती की की वो हमारे पास बैठे. पर उसने कहा “साँझ हो रही है हटो मुझे चूल्हा जलना है माँ मेरा इंतज़ार कर रही होंगी, मैं खाना खाने के बाद माँ के साथ आएँगी”. यह बोल के वो चली गयी.

वैसे गांव में खाना जल्दी बन जाता है और सात-सडेसात बजे (७- ७.३०प्म्) तक साबका खाना हो जता है. मै अब बेसब्री से उसके आने का इंतज़ार करने लगा. ७ बजे Bhabhi ने कहा चल के भोजन कर लेने को तो हमने मना कर दीया कहा मुझे आदत नहीं है इतने जल्दी खाना खाने की. पर Bhabhi ने खहा की चल के मैं अगर ताउजी और भैया के साथ खा लेते तो आछा होता. पर मेरा दील ही नहीं कर रह था. ताउजी का दुतालला माकन था (२-स्टोरी bunglov) और उसके ऊपर छत थी मैं छत पे खाट बिछाके आराम करने लगा.मुझे तारौ को देखना बहुत आछा लगता है सो मैं काफी देर तक तारों को देख रहा थे थाभी Bhabhi कीसीको लेकर हमारे पास आई उन्होने बताया की वो दीपा की माँ हैं . मैने उन्हें नमस्कार करके हाल चाल पुछा. फीर Bhabhi से पुछा दीपा नहीं आयी है क्या. Bhabhi ने बताया की नीचे हमारे भतीजे को कहानी सुना रही है. मैं नीचे की तरफ लपका Bhabhi के कमरे में देखा तो वहाँ दीपा हमारे भतीजे को कहानी सुना रही थी. मुझे देखते ही व्हो भाग गयी. थोड़ी देर बाद आयी और कहना खाने को चलने के लीये कहा. मैं रसोईघर में उसके पीछे पीछे चले ग्या. मैं वहाँ पे बैठा और वो हमारे लीये खाना निकलने लगी. हमने उससे बात करनी शुरू की. थोड़ी देर में ही वो हमसे घुलमील गयी. फीर व्हो मुझे अपने बचपन के कीस्से सुनने लगी. खाना खाने के बाद मैं दीपा के साथ Bhabhi के पास ग्या Bhabhi ने मुझे सोने के लीये जाने को कहा. और दीपा को कहा की मुझे कमरा दीखा दे और व्हो घर चली जाये, क्योंकी उसकी माँ
देरी से आएँगी.

मैने सोचा यही मौका है कुछ करने का. दीपा को देखते ही हमारा लंड सलामी देने लगता था. उसके उभरे हुए माम्मेय और चिकना हुआ बदन चांदनी रात में सोने पे सुहागा कीये जा रह था. हमारा कमरा सबसे नीचे ताउजी के कमरे के बगल में था. नीचे पहुंच के हमने देखा ताउजी सो ग्या हैं, हमने दीपा से कहा की व्हो थोडा रूक जाये क्योंकी मुझे इतनी जल्दी सोने की आदत नहीं है. वो हमारे साथ बैठकर बात करे. वो तयार हो गयी . व्हो हमारे बगल में ही बैठी थी. हमारा बहुत मन कर रह था उसको छूने का. मैने उसका हाँथ पकड़ लीया थोडा सा वीरोध करने के बाद वो शांत हो गयी. इससे मेरा हौसला और बढ गया. मैंने उसके क़मर पे हाँथ रख दीया जैसे ही हमने उसके क़मर पे हाँथ रखा वो सिहक गयी और अपना सर हमारे कंधे(शौल्देर) पे रख दीया. अब क्या था हमने उसके गाल पे चुम्बनों की बौछार शुरू कर दी. वो शरमाते हुए अपना मुह छुपाने लगी. हमने उसके कुर्ते के ऊपर से ही उसके उरोझ(Boobs) पे हाँथ रख दीया और हल्का सा दबाया उसके मुह से हलकी सी सिस्कारी निकलने लगी स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीईईईईईईईईईईईई…आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…. इस तरह से. हमने देखा की वो विरोध नहीं कर रही तो हमने दोनो हाथों से उसके मुम्मे (Boobs) हलके हलके से दबाना शुरू कर दिया. और अपना मुख ( माउथ) उसके मुख के पास ले ग्या और उसके होंठों को चूमने लगे. इतने में हमारा एक हाँथ नीचे से उसके सलवार के अन्दर पहुंच गया , जैसे ही मेरे हाँथ ने उसकी चूत के रोंदर बलों( झंट) पे दौड़ उसके मुख से सीत्कार नीकल
गयी जो की हमारे होंटों से ही दबी रह गयी. हमने देखा की व्हो काफी गरम हो गयी है तो हमने हलके से उसका कुरता उठाने लगे और जैसे ही हमने देखा की व्हो तनीक भी विरोध नहीं कर रही हैं हमने तुरंत ही उसका कुरता उप्पर से उतर दीया. है हमने देखा उसके बगल में सुनेहेरे बाल उगे थे जो मुझे और भी उसके ऊपर कामुक (Sexy) लगा. मैं ऊपर ऊपर से ही उसकी चूची दबाने लगे उसकी चूची इतनी मांसल और बड़ी थी की हमारे हाँथ में नहीं आ रही थी, साथ ही साथ हमारा ६ इंच का लंड भी बहर आने के लीये बेक़रार हो रह था हमने अपनी पैंट की जीप खोली और vip की चड्डी में जो छेद रहता है, हमने वहीँ से अपना लंड बहार नीकल दीया. नीकाल के हमने देखा दीपा हमारे लंड को देख कर शर्म गयी तो हमने उसके शरम भगाने के लीये उसक हाँथ हमारे लंड पे रख कर मुठबजी का कला उसे सिखाने लगे. थोड़ी ही पल में उसकी शरम जाती रही फीर क्या था मैने बेशरम होके उसकी ब्रा खोल दी उसकी ब्रा खुलते ही उसके सुडौल चूचीयां लपकने लगी इतनी सुंदर और कामुक चूचीयां आज तक मैंने अपनी जिन्दगी में नहीं देखी थोड़ी देर तक मैं उसके चुचियों के साथ खेलते राह और अंत में उसकी उत्तेजना को और भड़काने के लीये मैंने ऊपर के तरफ उसकी चूचीयां खीची. उसे बहुत जम के दर्द का एहसास हुआ और उसके मुह से आआआआआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्………… निकल आयी. फीर मैं उसके चूचियों को चूसने लगा और व्हो मेरा लंड मुठीया रही थी. मैंने बीना वक़्त गवाए उसके सलवार का नाडा खोल दीया और उसका सलवार चड्डी के साथ नीचे खींच लीया. हे राम उसकी अन्चुदी बुर (चूत) को देख कर मैं दंग रह गया. मैंने बीना वक़्त गवाये उसे बिस्तर पे लीटा दीया और उसके क़मर के नीचे ताकीया रख दीया और उसकी बुर चाटने लगा. मैंने एक हाँथ की उँगलियों से उसके बुर की फाकीयां फैलाई और अपनी चटोरी जीभ उसके बुर में पेल दी. वो चाट्पताने लगी. मैं अपने दूसरे हाँथ से उसकी चूचीयीओं को बरी बरी सेहेला-दबा
रह था. थोड़ी ही देर में व्हो झड गयी. और उसकी चूत से निकला हुआ रस मैं पुरा पी गया. दो मिनट के लीये व्हो ठण्डी पड़ गयी और वैसी ही लेटी रही.

मैंने अपना चूची दबाने का कार्यक्रम जरी रखा जिससे वो कुछ ही देर में फीर से उततेजीत हो गयी (गरम). मैंने उसके दोनों पांव फैला दीये और घुटने के बल उसके पैरों के बीच बैठ गया उसने मेरा बड़ा और मोटा लंड देखा और ड़र सी और कहा “अगर तुम यह मेरी बुर में घुसोगे तो मेरी बुर फट जायेगी, मेरी बुर मत फाडो” मैंने उसे समझाया की यह तो चोटी सी चीज है यही व्हो जगह है जहाँ से बच्चा पैदा होता है. कीसी तरह वो मनी मेनेआव देखा ना ताव जल्दी से अपने लंड पे और उसकी चूत पे अपने मुह से थोडा थूक नीकाल के लगा दीया और अपने लंड का सुपदा उसके चूत के मुहाने पे जैसे ही लगाया वो सीस कर उठी. मैंने धीरे से धक्का दीया पर मेरा लंड अन्दर जा ही नहीं रह था और उसे तकलीफ भी होने लगी.

तुब मुझे अपने गुरू “मस्तराम” की याद आई जिसकी किताबें मैं पढ कर्ता था. मैंने कहीँ पढा था की अगर लडकी अन्चुदी हो या उसकी चूत कासी हो तो ऐसे लड़कियों के अगर चूचीयों को अगर नीचे से ऊपर के ऊर खीचा जाये और साथ में लंड घुसाया जाये तो लडकी को तकलीफ भी कम होती है और मेरा लंड भी आराम से जाने लगता है क्योंकी हमारे गुरुजी ” मस्त्रमजी ” का यह मनाना है की चूचीयां ही सारे द्वार खोल देती हैं. वो बात फीर कभी मैंने गुरुजी का नाम लीया और दीपा की चूचियां मसलन शुरू कर दीया और धीरे धीरे अपना लंड अन्दर की तरफ हलके हलके पेलने लगा, इस प्रकार दीपा को दर्द भी कम हो रह था और मुझे भी ज्यादा तकलीफ नहीं हो रही थी. अभी मेरा लंड आधा से थोडा ज्यादा ही अंदर गया था की मेरा लंड झ्हीली से टकरा गया. मैंने दीपा के चूची के टोक मसलन शुरू कीया और अपनी रफ्तार तेज करने लगा, धीरे धीरे रफ्तार तेज करते हुए मैं अपना लंड और अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा. पर
झिल्ली आने की वजह से मेरा लंड और अंदर जा नहीं रह था फीर मैंने एक ज़ोर की थाप मरी और दीपा के होटों पे होंठ रख दीया क्योंकी मुझे मालूम था वो चिल्लाने वाली है. जैसे ही मैंने ज़ोर की थाप मरी उसकी झिल्ली फट गयी और चूत से ख़ून बेहेने लगा उसके आंखों से आंसू बेहेने लगे मैंने हिलना एकदम से बंद कर दीया और उसकी चूचियों को फीर से ऊपर की और पहेले जैसे खीचने लगा. उसका दर्द कम होने लगा और उसे मजा आने लगा, मैंने हलके हलके अपने थाप शुरू कर दी कुछ ही पल में व्हो बोलने लगी “फाड़ डालो ॐ आज मेरी बुर को पूरी तरह, जालीम क्या नशा छा रह है! हई ॐ चोदो मुझे और कास के चोदो”. यह सुनते ही मेरे अंदर का शैतान जाग गया और मैंने अपने रफ्तार बहुत तेज कर दी. दस मिनट के अन्दर ही मैं दोनो झड ग्ये. मैंने कुछ पल रूककर एक बार और चढाई शुरू कर दी इस बार दीपा को मजा आने लगा और वो उच्चाल उच्चाल कर मेरा साथ देने लगी. थोड़े देर में मैं फीर झडा. फीर दो मिनट तक मैं उसके
ऊपर पड़ा रहा. मैंने उसे कहा की कपडे पहेन लो और चलो मैं घर छोड आता हूँ.

उसने जल्दी जल्दी अपने कपडे पेहेने और मैंने भी अपने कपडे पेहेने और उसे उसके घर छोड़ने चला गया. मैंने उसे कहा अगले दीन मुझे दोपहर में मेरे घर मील्ना क्योंकी अगले दीन मैं अपने घर में रेहेने जाने वाला था जो मेरे ताउजी के घर के बिल्कुल सामने ही था. ओउए वो मुस्कुरा के चली गयी …

उनको प्यास बुझाए मैले

उनको प्यास बुझाए मैले

नमस्कार मेरो तर्फबाट
शुरुमा मेरो परिचय म तपाईहरुको नै सपनाको राजकुमार हु जो कोहीले पनि मलाई आफ्नो deeam boy बनाउन सक्नु हुन्छ नेपाली स्टोरीमा प्रकाशीत यस अगाडीका मेरा दुईवटा स्टोरीहरु तपाईहरुले धेरै मन पारिदिनु भयो अनि धेरै मेल हरु पनि आए कतिपयले गाली गरे त कतिपयले अफर पनि गरे जे होस यस अगाडिका मेरा काहनीहरु लाहुरेकी बुढी सँगको रोमान्स अनि सुन्तली अनि म यी दुबै काहानी पढेर तपाईहरुले दिएको मायाले गर्दा फेरी अर्को काहानी लेख्दै छु ।
रातको 11 बजिसकेको थियो मलाई निन्द्रा आएको थिएन के गरु कसो गरु भईरहेको थियो । निद्रा नपरेकोले फेरी कम्युटर ओपन गरेर मेरो याहु म्यसेन्जर ओपन गरे त्याह कुनै नयाँ ब्याक्तिले मलाई एड गरेको रहेछ अनि अफलाईन म्यासेज पनि जसको स्वरुप यस्तो थियो (Hi , Timro kahani nepali story ma maila pada Ani timi lai bhatna man lagyo please mail gara la mali saath ma timro h/p pani diyara ) मैले यसको जवाफ पनि दिए अनि मेरो मोवाईल छैन भनी झुट भने किनकी मलाई डर लाग्यो को हो के हो भनेर अनि ईमेल खोलेर हेरेको त त्यही आईडीबाट मेल पनि आएको रहेछ जसमा उसको फोन नं पनि थियो नाम हेर्दा केटीको जस्तो लाग्थ्यो तर मलाई शंका थियो कि कुनै केटाले झुक्याको भनेर यत्तीकैमा मोवाईलाम नं सेभ गरे अनि सुत्ने तरखरमा लागे , भोलीपल्ट बिहानै उठेर बाहिर तिर निस्के केही साथिहरु भेटेर एकछिन रमाईलो पनि गरियो अनि फर्कने क्रमामा बाटोमा फोन पसल देखेर फेरी हिजोको कुरा सम्झे अनि एक कल गर्नु पर्यो को रहेछ भनेर अनि मैले फोन गरे त्यो मोवाईलामा तर त्याहा पनि एक छिन झन्झट नै बेहेर्नु पर्यो एउटी दिदीले “तपाईले सम्पर्क गर्ने खोज्नु भएको मोवाईलमा अहिले सम्पर्क हुन सकेन कृपया केहीछिन पछी पुन प्रयास गर्नु होला” यही आवाज दुई तिन पटक सुनेपछी फोन लाग्यो अनि फोनमा एउटी महिलाको आवाज आयो अनि म ढुक्क भए कि कसैले मलाई चिट गरेको रहेनछ भनेर । उनले मेरो परिचय मागिन मैले भने भने रोमान्स ब्वाई उनले मेरो यही कुराबाट मेरो कुरा बुझीन अनि भनिन् तिम्रो रिप्लाई पाएकी थिए मलाई भेट्ने हो भनिन् तर मैले कसरी भेट्ने चिन्नु न जान्नुको मान्छेलाई भनी ठाडो जवाफ दिए उनले निकै नम्रा भएर कुरा गरिरहेकी थिईन अनि उनले मेरो उमेर सोधिन मैले 21 भने अनि आफु 25 भएको कुरा गरिन् अनि कुरा कुरामा हाम्रो भेट्ने कुरा भयो । अनि म मेरो तुम तिर लागे
भोली पल्ट बिहान 10 बजे नै म उनले बोलाएको ठाउमा गए अनि उनी आउने बाटो हेरी कुरी बसे तर म उनले बोलाएको भन्दा आधा घण्ट अगाडी नै त्यहा पुगेको थिए । केही बेर पछी मैले पुन नजिकैको टेलीफोन पसलमा गई उनलाई फोन गरेर सोधे किन मलाई ढाँटेको आउने होईन भनेर तर उनले आईसकेको कुरा गरिन अनि फोन गर्दै यसो हेरेको त एउटा अर्धबैशै महिला फोन लिएर सडको कुनै कुनामा कुरा गरिराखेको देखे अनि अन्दाज पनि लगाए पक्कै यही हुनु पर्छ भनेर अनि म उनको नजिक गएर सोधे किन तपाईले मलाई आफ्नो उमेर ढाटेको भनेर एक अन्जान ब्याक्तिले यसरी उनलाई कुरा गर्दा उनि दंग परिन् अनि सोधीन तिमी को ??मैले हिजो फोन गर्ने केटा भनेर भने उनले जवाफमा किन म राम्री छैन भन्ने जवाफ दिईन हो हुन पनि “उमेरमा 30 नाघेकी भए पनि उनको शरिर निकै आकर्षक थियो पोटीला स्तन अनि रातो कुर्ता सुरवालमा उनि निकै सेक्सी देखीएको थिईन उनको पहिरान बाट नै थाहा भयो कि उनी एक उच्च परिवारकी हुन् भनेर अनि मैले जोकिङ गरेको नि भने उनले नजिकै आएको ट्याक्सी रोक्दै जाउ भनिन् मलाई एक्कासी उनको ब्याबाहरले निकै डर पनि लाग्यो तर जे पर्ला पर्ला भनेर म उनको साथमा गए उनले ट्याक्सी वालालाई बागबजारको कुनै होटलको नाम दिई त्यहा लान भनि अनि बाटोमा कुरा गर्दा गर्दै हामी त्यो होटलमा गयौ । होटेलमा पुगेपछी म उनको पछी पछी थिए होटेलको एउटा कुनाको टेवलाम पुग्यौ म जस्ट उनको फलो गर्दै थिए म केही बोलेको थीईन उनले त्याह पुगेपछी दुईवटा चिसो अर्डर गरिन् मैल चिसो पिउदै उनलाई हेरीरहेको थिए मैले कुनै कुरा बोलेको थिईन उनले वयटरलाई चिसोको पैसा दिईन अनि वयटरले पैसा फिर्ता दियो उनले सबै पैसा उसलाई नै राख्न लगाईन अनि रुमको कुरा गरिन् वयटर पनि धेरै टिप्स पाएर होला निकै खुसी थियो अनि रुमको सँचो लिएर आयो अनि उनले मलाई भनिन् भाई तिमी चाबी लिएर माथि जाउ म आउछु अनि उनले वयटरलाई भन्दै थिइन यो मेरो गाउबाट आएको भाई हो काठमाण्डौमा नया छ बिदेश जानको लागी आएको भनेर भनिन् वयटरले पनि उनलाई एजेन्ट हो भन्ने सोचेछ हाम्रो कुरामा केही वास्त गरेन म रुममा गई उनलाई कुरेर बसेको थिए आधा घण्टा पछी बल्ल उनी रुमामा आईन मैले उनलाई किन ढिला गरेको भनी सोधे उनले भनिन् ईज्जतको पनि त सवाल गर्नु पर्यो यति कुरा भनिन् मैले धेरै केही सोधिन हातको ब्यग टेवलमा राख्दै उनले भनिन् हेर्दा त धेरै सेक्सी अनि स्टोरोङ् छ नि तिमी त भनेर म पनि मौकाको फाईदा उठाउदै तपाई पनि त केही कमी छैन भनेर उनको स्तनमा समाते तर उनले किन हतार भन्दै मेरो निधारमा एक किस गरिन् “मलाई सबै कुरा सपना जस्तो लागेको थियो बेला बेलामा सपना त होईन भनी आफ्नै हात चिमोटी हेर्थे तर म बिपनामा नै थिए” हामी हरु एक अर्कोको नजिक बसेर कुरा गर्दै थियौ मैले मेरो बारेमा भन्दै थिए उनले उनको बारेमा हामीमा निकै रमाईलो कुरा हुदै थियो मैले बिस्तारै कुराको सिलसिलामा नै मेरा हात उनको स्तनको वरिपरी सुम्सुमाउथे मलाई निकै मजा आईरहेको थियो उनको स्तन पनि निकै कसिलो हुदै गएको थियो स्तन सुम्सुमाउदै मेरा हात उनको पेट हुदै उनको साप्रा सम्म पुग्यो अनि एक हातले मैले उनको हिप पनि सुम्सुमाउदै थिए यत्तीकैमा मेरो भाई निकै पोटीलो भएको थियो मेरो पाईन्ट नै छेड्ला जस्तो गरी मैले उनलाई आफ्नो कुर्ता खोल्न आग्रह गरे उनले लाज नै नमानी एकै पटकमा खोली दिईन उनले कालो ब्रा लगाएकी थिईन कालो ब्रा मा उनका पोटीला स्तन निकै राम्रा देखिन्थे मन मनले मलाई उनको दुध खान मन लागेको थियो तर मैले हतार गरेको थिएन कनकी म उनलाई धेरै मजा दिन चाहान्थे उनले मेरो काहानी पढेर मैले राम्रो मजा दिन सक्छ भन्ने बिश्वसका साथ एक अपरिचितलाई आफ्नो सबै शरिर सुम्पिन तयार भएकी थिईन मैले पनि उनको बिश्वास मार्ने हुन्न भन्ने सोचेको थिए त्यसैले मैले उनलाई धेरै माजा दिन्छु भन्ने अटोट गरेको थिए केही बेरमा मैले उनको ब्रा पनि उनको शरिर बाट अलग गरिदिए मेरो अगाडी अर्धा नग्न महिला देखेर म निकै कामुक भएको थिए बिना कपडामा मैले उनको नाड्गो स्तन माड्दै थिए अनि केही बेरमा नै मैले उनको स्तन बच्चाले जस्तै चुस्न थाले उनलाई निकै काउकुती लागेको थियो बिच बिचमा आ……..आ व व जस्ता शब्द निकाल्दै थिईन निकै बेरको चुसाई पछी मेरा हात मैले उनको दुई खुट्टाको बिचमा लगे तर त्याह सुरवाल पनि थियो मैले एकै झट्कामा उनको शरिरबाट उनको सुरवाल अलग गरीदिए अनि उनको गुलाबी कट्टुको बाहिर हात फिरफिराएको त सबै चिसो थियो अनि अझै बढी हात यता उता परेको त मेरो हातमा कुनै चिल्लो पदार्थ टाँसियो मैले उनलाई प्रश्न गरे के हो यो उनले जवाफ दिईन पानी पो झरेछ “उनको स्वाभाव निकै सोझो थियो हुनत बलीरहेको ज्वाला सान्त पार्नेलाई होला उनि चुपचाप बसेकी जो कोही पनि उनलाई नजिकबाट हेर्दा उनि यति सेक्सी छिन् भनेर पत्याउने थिएन होला हुनत चकचकेले गाल पार्यो घुसघुसेले ताल पार्यो भन्ने उखान उनमा लागु भएको थियो म पनि उनको सोझोपनबाट निकै खुसी थिए सपनामा जस्तो अनुभव भएको थियो मैले उनको यौनीको वरिपरी मेरा हातहरु निकै सलवलाएको थिए हुनत मैले उनको स्तन जोडले चुसेर होला उनको यौनीबाट प्यसको खोलो बगेको मलाई लागेको थिएन उनले यति धेरै पानी झार्छीन भनेर तर उनको दुलोबाट झरेको पानीमा निकै मिठो सुवास थियो लाग्थ्यो सबै एकैपटक पिईदिउ तर म मन सम्हाल्दै थिए त्यस्तीकैमा उनले मलाई आफुबाट अलग गरिन् अनि मेरो सट फुकालीदिईन बिस्तारै पाईन्ट पनि अनि मेरो फन्फनाउदो माललाई कट्टु बाहिर बाट स्पर्स गर्दै आफ्मै आज गतिलै माल चाख्न पाईएला जस्तो छ भन्दै थिईन मेरो कट्टु म बाट बाहिर गराईन अनि मेरो भाईलाई हेर्दै “आंम्मै केटाको तुरी त गतिलै छ त “ उनको यो कुराले म झन् पागल भए उनि मेरो मालको दर्सन पाएर निकै खुसी थिईन अनि उनले बिस्तारै मेरो भाईलाई आफ्नो नरम हातले सलबलाउन थालिन अनि मैले पनि उनको शरिर सुम्सुमाउदै थिए अनि उनले मलाई बेडमा उत्तानो पारेर लडाइन अनि आफ्नो कपाल मुखबाट हटाउदै आफ्नो ओठले मेरो भईलाई किस गरिन् म सहनै नसक्ने भएको थिए तर कुनै जवाफ दिएको थिएन उनले भनिन् पहिला यसको पानी म पिउछु अनि मात्र तिमीलाई मेरो कुवाको पानी खुवाउछु यति भन्दै उनले आफ्नो मुखमा मेरो भईलाई लगेर चुस्न थालिन मलाई निकै मजा आईरहेको थियो अनि म दंग पनि थिए उनले लगातार चुस्दै थिईन मैले उनलाई सोधे तपाईले बुलु फिल्म हेर्।नु हुन्छ र उनले प्रतिउत्तमा जवाफ दिईन किन मैले फेरी सोधे नेपाली नारीहरु यस्तो मुखमा लिन घिन मान्छन् नि तर ……….उनले जवाफ फर्काई हालीन किन घिन मान्नु यो कुनै नराम्रो कुरा हो र बुलु फिल्म त आजकल नर्मल नै हो नहेर्ने को पो होला र अन िमैले बल्ल थाहा पाएकी उनको बारे मा अनि उनको चुसाईले मेरो माल झर्ला जस्तो भएको थियो मैले उनलाई भने मेरो माल झर्ने लाग्यो उनले भनिन मेरो मुखमा नै छोड मैले पनि के कम थिएर एकै पटक रोकेर सबै झारीदिए उनको मुखमा उनले छि भन्दै सबै माललाई ट्वाईलेटमा गएर मुखबाट फालीन अनि फेरी टावल लिएर मेरो भाईलाई सफा गरिन् म सिथिल भएको थिए केही छिन को हाम्रो कुरापछि म फेरी उत्तेजीत भए उनलाई सुम्सुमाउन थाले अनि अनि उनी पुन जोशमा आईन मैले उनको स्तन फेरी चुस्न थाले मेरो स्पर्षले फेरी उनको यौनीबाट पानीको धारा बग्न थाल्यो उनले म तिर हेर्दै मेरो पनि चाटन भन्न थालिन मैले घिन लाग्छ भन्दा मेरो चाही हुने तिमी चाही नहुने प्लीज भनिन् उनको धेरै बेरको कर पछी म बाध्यतामा परे अनि सोचे “कसैले पानी दिन्छ भने पानी खाएर भाडो फल्नु हुदैन” अनि जिब्रोले उनको यौनीको रातो हिमाल मा टच गरे तर उनको यौनीबाट धेरै पानी बगेको हुनाले मेरो जाता ततै उनको चिप्लो पानी टाँसियो हुनपनि मलाई लागिरहेको थियो म उनको पोखरीमा पौडी खैल्दै छु
मलाई पनि निकै माजा महसुस भईरहेको थियो उनी पनि त्यस्तै नै कामुक देखीन्थिन आ आ आ आ आ आ व व व व व व व यस्ता शब्दहरु उनको मुखबाट निस्की रहेका थए मैले उनको यौनीमा मेरो जिब्रोले टच गर्दै उनी झनै उत्तेजित हुन्थिन मैले पनि निकै बेर उनको यौनी मा मेरो जिब्रो लगाई राखे अनि उनको बाट अझै धेरै पानी बग्यो मैले मेरो जिब्रो निकालेर उनको मुखमा जोडे अनि एक अर्कोमा हामीले जिब्रोको स्वाद लिईरहयौ केही बेरमा मैले मेरा औलाहरु उनको यौनीमा हाल्न थाले उनि जोशले होशमा थिईनन् मेरा औला जति भित्र जान्थे उनी त्यती उत्तेजित हुदै आफ्नो ढाड माथि सार्थिन अनि मेरा औलाको स्पर्सेले उनको पानीले बेडमा नै खोला बग्यो मलाई पनि अचम्म लाग्यो यति धेरै पानी बगेको देखेर जे होस मैले पनि एउटा नया अनुभब गरेको थिए निकै बेरको चिकाचिकी पछी उनले सहन सकिनन् अनि प्लीज प्लीज मेरो दुलोमा हाला प्लीज भन्न थालिन म अब सहन सक्तिन छिटो गर मेरो च्यातिदेउ म पनि आफ्नो फनफनाईरहेको माललाई एक स्वाटमै उनको भित्र पसाउने सुरले भित्र हाले तर त्यति धेरैपानी बगेर चिप्लो हुदा पनि एकै पटकमा पसेन मैले दोस्रो धक्का दिए अनि पुरै भित्र पस्यो तब उनको शरिरमा अनौठो कम्पन भयो उनले बेग्लै फिलीङ्स गरिन अनि भन्दै थिईन जिवन भर नै यसरी नै मजा देउ म पनि ल्वाम ल्वम भित्र बाहिर बनाउदै थिए उनि चरमा आनन्दाम थिईन आखाँ बन्द गरेर या या या या या व व व व व आआआआआआ गर्दै थिईन मैले पनि आफ्ने सुरमा दिदै थिए करिब 15 मिनेटको मच्चाई पछी मेरो झर्ने बेला भयो उनि पनि उनि पनि सिथिल भएकी थिईन अनि मैले मेरो माल उनको भित्र झारिन किनकी यसले फेरी उनलाई असर पर्ने सक्छ भनेर अनि बाहिर झिकेर उको शरिरमा मेरा फोराहरु फिजाईदिए उनी पनि शिथिल भएर आफ्नो शरिरमा दल्न थालिन अनि हामी एक अर्को को अंगालोमा बाधिएर करिब 20 मिनेट थकाई मार्यो अनि मैले उनलाई सोधे मजा आयो उनले भनिन जिवनमा पहिलो पल्ट यति मजा लिए तिमी मेरो जिवनमा ईश्वरको बरदान बनेर आयौ मेरो लागी तिमी देवता हो भनिन् हुन पनि मलाई लागेको थियो मैले उनलाई सन्टुष्टी दिए भनेर त्यो दिन बेलुका सम्मा हाम्रो करिव 4 पटक सम्म काम भयो अनि बेलुका उनले फेरी भेट्ने बाचाका साथ मालाई बिदा गरिन् अनि म पनि खुसी भएर रुममा फर्के यसको 1 महिना पछी उनको बुढा पनि बिदेशबाट फर्केछ उनले मलाई मेलमा जानकारि दिईन अनि भन्दै थिईन एकदिन फेरी भेट्ने बुढाबाट मैले सन्टुष्टी पाउन सकेकी छैन फेरी पनि मेरो प्यास बुझाईदेउ भनेर तर समयले गर्दा हाम्रो भेट भएको छैन

मेरो बारेम :- हुनत मैले नेपाली स्टोरीमा यो सँग तिनवटा कथाहरु लेखी सके अनि धेरै राम्रो नराम्रो सुझावहरु आएको छ फेरी पनि हजुरहरुको मेलको आशामा छु मेल गर्नु भयो भने कुनै न कुनै माध्यमवाट स्टोरी सेन्ड गर्ने छु मेरो सम्पर्कको लागी (mail_gara@yahoo.com) मा मेल गर्नु वा अनलाईन एड गर्ने अनि एउटा बल्गबाट अर्को ब्लगमा साभार गर्दे मेरो बारेमा भन्ने सबै कपी गर्नु होला तपाईहरुको मेलको प्रतिक्षामा छु

दुइ दृष्य

दुइ दृष्य

सागर र पार्वती एक आम दम्पति हुन्। सागर कम्प्युटर इन्जीनियर हुन् र काठमाण्डौंमा आफ्नै विजनेश गर्छन्। पार्वतीले बीबीएस गरेकीछिन् र सागरको बिजनेशमा सघाउँछिन्। हुन त जेठी बुहारी भएकोले घरको कामकाजमा नै उनको बढि समय खर्च हुन्छ। आमा बुवाले घरको परम्परा राम्रैसंग सम्हाल्नु भएको छ। भाइ र बहिनीको पनि बिहेवारी भइसकेको छ। सागर बिहान सबेरै उठेर मर्निङ्ग वाक गर्न रुचाउछन्। हरेक बिहान ४-५ किलोमीटर हिंड्ने गरेकोले उस्ले स्वस्थ्य शरिर मेण्टेन गरेका छन्। ३ वर्षकी छोरी सीमा घर नजिकैको स्कूल जान्छिन्। उ घरमा नहुंदा घरै सुन्यजस्तो लाग्छ – अरुबेला चकचक गरेर सबैलाइ रमाइलो पार्छिन्। बुवाको औषधि खाने ताइम तेबुल आमालाइ भन्दा बढि पार्वतीलाइ याद रहन्छ। आमा चाडपर्व र घरका सबैको तिथिअनुसारको जन्मदिनहरु मनाउने अनि सो अनुसार मन्दिरहरुको दर्शन परिक्रमा गर्नमै बढि रुचाउनुहुन्छ। साँझ खाना खाइसकेपछि तिभि हेर्न बस्दा रिमोट कन्ट्रोलको लागि कहिलेकाहिं तानातान हुन्छ। छोरीलाइ कार्टुन चाहिने, बुहारीहरुलाइ हिन्दी सिरियल, सागरलाइ स्पोर्टस् अनि बुवालाइ नेपाल तिभि। अनि नेपाली समाचार हेर्न थालेपछि छोरी बिस्तारै हाइहाइ गर्न थाल्छिन र हजुरबुवाको काखमै निदाउँछिन। समाचार पछि बुवा आफ्नो कोठामा अबेर सम्म किताब पढ्नु हु्न्छ। अनि तिभिमा हिन्दी सिरियलहरु लाग्छ। एक क्षण पछि सागर पनि आफ्नै कोठामा कम्प्युटर खोल्न पुग्छन्। एउता दुइता सिरियलहरु हेरे पछि पार्वती पनि आफ्नो कोठामा जान्छिन्। केहि न केहि कुरा गर्दै बेड मिलाउँछिन अनि कति कम्प्युटरमा मात्र बस्नुहुन्छ, सुत्नुस भन्दै आफै पहिला बेडमा पल्टिन्छन्। एक छिनपछि सागर पनि सुत्न तयार हुन्छ। अनि केहि बेरपछि बत्ती निभ्छ। सागर र पार्वतीको यस विवरणले हजारौं, लाखौं नेपाली परिवारको प्रतिनिधित्व गर्छ। र साधारणतया पारिवारिक दिनचर्याको संक्षिप्त वर्णन यतिसम्मको चित्रणमा सकिन्छ।

अब अर्को एउता पुरै फरक दृष्य – एउता डिभीडीबाट। दुइ नेपाली जस्तै देखिने दम्पति (नेपाली नै पनि हुन सक्छ वा फिलिपिनो हुनसक्छ) एउता सोफामा बसिराखेका छन्। केटीहरु बिचमा र उनीहरु (केटी केटी) मस्तसंग ओठ ओठ जोडेर चुम्बन गरिराखेका छन्। उनिहरुका हातहरु एक अर्कोको बुबु र गुप्ताङ्गमाथि खेलिराखेका छन्। एकछिन उनीहरुको खेल हेरेपछि दुबै केटाहरु पनि आआफ्ना लुगाहरु खोलेर निर्वस्त्र हुन्छन् र श्रीमतीहरुको खेलमा साथ दिन पुग्छन। एउती केटी उठेर गइ बेडमा उत्तानो परेर पल्टिदिन्छिन्। अनि एउटा केटा उनको खुल्ला योनिमा आफ्नो ओठ र जिब्रो चलाउन थाल्छिन्। बाँकि केटा र केटी हरु त्यहि पल्टिएकि केटीको एउता एउता बुबु चुस्न थाल्छन्। उनी जोड जोडले आहा आहा कराउन थाल्छिन।

केटीहरुले अब एक अर्को माथि 69 पोजिशनमा बसेका छन्। माथि बसेको केटीको कम्मर समातेर एउता केटा आफ्नो साह्रो लिङ्ग उसको पुतिमा पछादिबाट घुसाउँछन्। अब त्यो माथिको केटीको योनिमा लाडो पनि घुसिराखेको छ र मुनिबाट clitoris मा जिब्रो पनि चलिराखेको छ। उनको आनन्दको अब सीमा छैन्। तल पत्तिको केटीले पुतिमा घुस्दै निस्कंदै गरेको लाडोलाइ पनि आफ्नो जिब्रोले जिस्क्याइरहेकि छिन्। अब आफ्नो लाडोले पुति र मुखको एकै चोटि घर्षण पाएकोले केटाको पनि आनन्द असिमित छ। अर्को केटा अगादि गएर माथिको केटीको मुखमा आफ्नो लिङ्ग चुसाउन पुग्छन्। केटीले एकै छिनमा लिङ्गलाइ आफ्नो मुखबाट निकालेर हातले समातेर तल पत्तिको केटीको पुतिमा घुसाइदिन्छिन्। यसरि उसको चाहिं लाडो एक दनक मुखमा एक दनक पुतिमा पस्न थाल्छ। एकैसाथ दुइ किसिमको अनुभवले आफ्नो balance सम्हाल्न उ अर्को केटाको हात समात्न पुग्छन्। अनि आनन्दले बिभोर दुबै केटाहरु पनि अंकमाल गरेर तलको आफ्नो काम जारी राख्छन्।

तल पल्तेकी केटीलाइ सायद अप्ठेरो भएर उनीहरु पोजिसन बदल्छन्। अब केटा पहिले उत्तानो परेर पल्टिन्छ। अनि त्यो केटी उसको माथि 69 पोजिशनमा गएर केटाको लाडो चुस्न थाल्छ। अर्को केटा पछादिबाट आएर उसको पुतिमा आफ्नो लाडो घुसाउँछन्। मुनिबाट अर्को केटाले उसको योनि वरिपरि चात्न थाल्छ। अब उसको पुतिमा केटाहरुको लाडो पनि छ अनि मुख र जिब्रो पनि। अनि मुखमा पनि लाडो चुसिराखेको छ। उसको खुशी र आनन्दको अहिले बयानै गर्न सकिन्न। पुतिमा पस्दै निस्कदै गरेको लिङ्गलाइ तलको केटाले हातले अण्डकोश खेलाइ राखेको छन्। अर्को केटी माथिको केटा छेउ जान्छिन अनि केटाले उसको बुबु समातेर माड्न र खान थाल्छन। केटी चाहि आफ्नै हातले आफ्नो योनि जोड जोडले माड्न थाल्छिन्।

अब यी दुइ दृष्यहरुको बीच के सम्बन्ध छ त? सम्बन्ध यसकारण छ कि यो डिभिडिको दृष्य सागरको कम्प्युटरको स्क्रिनमा देखिएको थियो। आफ्नो यौनजीवनमा रौनकता ल्याउन सागर र पार्वती समय समयमा ब्लू फिल्महरु हेर्ने गर्छन् यस्तै फिल्म हेर्ने क्रममा ग्रुप सेक्सको यो फिल्म हेरेदेखि राति सुत्ने बेला – विशेसगरि यौनकार्यको सुरुमा foreplay को समय उनीहरु त्यस फिल्मका दृष्यहरुको कुराकानी र कल्पना गर्छन्। विशेषगरि योनिमा लिङ्ग पनि पसाउने र बाहिरी भाग clitoris मा जिब्रो र मुखले पनि चुस्ने चात्ने कल्पना उनीहरुको लागि सबैभन्दा मनपर्ने fantasy बनेको छ। सागर तल पल्टेर उनीहरु 69 पोजिशनमा मुखमैथुन गर्दा उ आफ्नो बुढी औंला पार्वतीको पुतिमा जोड जोडले भित्र बाहिर गर्छन् । अनि कहिले काहिँ त्यो औंलालाइ आफ्नो मुखमा पनि पसाएर चुस्छन्। अनि फेरि पुतिमा घुसाउँछन्। पार्वतीलाइ त्यो औँलालाइ साँच्चैको लाडो भनेर कल्पना गर्न भन्छन्। त्यहि कल्पनामा मस्त भएर उनी आफ्नो योनि जोड जोडले सागरको मुखमा चलाउँछिन्। अनि सागरको लाडोलाइ बेस्सरी चुस्न थाल्छिन्।

यो कल्पना गरे जस्तै साँचै गर्ने होइन त? सागरको यो प्रश्नलाइ पहिले त पार्वतीले “छि के कुरा गरेको” भन्ने जवाफ दिन्थिन्। तर पछि पछि excitement को शीखर अवस्थामा “हो, हो, गर्ने ल” भन्न थालिन्। तर सेक्सुअल मुडमा नरहेको बेला यस्तै कुरा गरेर “तिमीले त हुन्छ भनेथ्यौ नि” भन्दा “कहाँ, साँचै पनि गर्छ? नचाहिने कुरा” भनेर कुरा लत्याइदिन्थिन्। तर सागर भने सेक्स गर्ने बेला समय समयमा यो प्रसंगको कुरा ल्याइ राख्थ्यो। अनि कहिले काहिं त्यस्तै फिल्महरुको डिभिडीहरु ल्याएर संगै हेर्ने गर्थ्यो। कम्प्युटरमा त इन्तरनेटबाट छानि छानि यस्तै अनेकौं फोटोहरु र सानातिना भिडियो क्लीपहरु उस्ले जम्मा गरेका छन्। कहिलेकाहिं दुबैजना यस्तै फोटोहरु कम्प्यूटरको स्क्रिनमा हेरेर नै अति उत्तेजित हुन्छन्। तीनजनाको सामुहिक सेक्स threesome र चारजनाको foursome को कुरा र प्रसंग अब उनीहरुको सेक्सुअल कुराकानीको एउटा नियमित विषय नै भएको छ।

“तपाइलाई अर्को केटीसंग गर्ने इच्छा छ हो? हो भने गर्नुस म केहि पनि भन्दिन।” पार्वती भन्थिन्। “कुरा मैले अर्को केटीसंग गर्ने वा तिमीले अर्को केटासंग छुट्टै चल्नेको होइन, दुइ जनामा मात्र सिमित सेक्समा अर्को ब्यक्ति वा दम्पतिलाई सामेल गराउनेको हो। दुइ जना मात्र हुंदा असम्भव कुराहरु तीनजना हुंदा सजिलै गर्न सकिन्छ” सागरले अलि सिरियस भएर भन्थ्यो, “जस्तो कि मलाइ तिम्रो योनि साँचैको लाँडो घु्स्दै गर्दा खाएर तिमीलाइ त्यो चरम आनन्द दिन चाहन्छु जसको हामीले धेरै समयदेखि कल्पना गरेकाछौं।” “अनि कस्लाइ गराउने त?” पार्वतीले जिस्किएर सोधिन्।

जिस्किएको भएपनि सागरले अब इन्टरनेतमा swinging र wife swapping को साइतहरु खोज्न थाल्यो। यस्तो कुरामा इच्छा हुनेले अर्को त्यस्तै इच्छा भएका दम्पति वा जोडीहरु खोजी, रोजी गोप्य रुपमा सम्पर्क गराउने केहि यस्ता साइतहरुमा सागरले आफ्नो पनि प्रोफाइल राख्यो। अनि विज्ञापन गरिएका प्रोफाइलहरु मध्ये छानी छानी कसैकसैलाइ सम्पर्क गर्न थाले। हजारौं हजार त्यस्ता विज्ञापनहरुमा नेपालको मात्रै भनेर फिल्टर गर्दा यथेस्त मात्रामा नेपालीहरुको पनि प्रोफाइल भेत्तिए। र अब अरु नेपालीहरुसंग इमेलमा सम्पर्क गर्ने कामको सुरुवाट भयो। एउता दुइता इमेल आदान प्रदान पछि MSN र Yahoo Messenger मा id थपियो। अनि ढिलो वा चाँदो केहि दिनमै मेसेन्जरमा भेटेर chat गर्ने बानी बस्न थाल्यो। धेरै थरिका मान्छेहरु संग सम्पर्क भयो। धेरै त अविबाहित केटाहरु मात्रै थिए, कोहि बिदेशी थिए, अनि कोहि कोहि चाहिं साँचै नै विबाहित जोडी थिए।

क्रमश:

बाँकि भाग २ - अर्को जोडी मा

अर्को जोडी दोश्रो भाग

अर्को जोडी दोश्रो भाग

पहिलो भागमा आफ्नै लोग्ने स्वास्नी बीच मात्र यौनसम्बन्ध राख्ने एक
साधारण नेपाली दम्पति सागर र पार्वतीमा बिस्तारै समुहगत सेक्सको fantasy
बढ्दै आएको प्रसंग थियो। आफ्नो fantasy तर्फ ख्याल ख्यालमा अगादि बढ्दै
जाँदा इन्टरनेट मार्फत सागरको सम्पर्क त्यस्तै इच्छा भएका अरु केहि
ब्यक्तिहरुसंग भएको थियो। अब अगादि ……..

अब यस्तै २-३ जनासंग नियमित मेसेन्जरमा भेट हुन थाल्यो। पछि हुंदा हुदै
एकजना संग मात्र बढि सम्पर्क हुने हुन थाल्यो। भुषण र तारा ३५ र ३३
वर्षका काठमाण्डौंकै दम्पति हुन्। भुषण एक सिभिल इन्जिनियर हुन् र एउता
बिदेशी consultant को नेपाल प्रोजेक्ट अफिसमा काम गर्छन्। तारा चाहिं
आफ्ना दुइ केटाकेटीहरुलाइ हेर्न र हुर्काउन घरधन्दामा नै लागेका रहेछन्।
अरु दाजु भाइहरु पनि सबै आआफ्नै घरमा छुट्टा छुट्टै settle भइसकेका छन्।
“हामी दुइ हाम्रा दुइ”को यो सुखी परिवार पनि नेपालको मध्यम बर्गीय
परिवारको अर्को साधारण उदाहरण हो।

सेक्सको विषयमा सागर र पार्वतीको जस्तै भुषण र ताराको पनि भिन्न भिन्न
तरिकाहरु कोशिस गर्ने रहर रहेछ। भुषणले हङ्गकङ्गबाट एउटा खेलौना लाडो
(dildo vibrator) किनेर ल्याएको रहेछ। 69 पोजिशनमा एकअर्काको गुप्ताङ्ग
चुस्दा भुषण त्यो ६ इन्चको खेलौना लाडो ताराको पुतिमा पसाउँछन। अनि
साँचैको जस्तो देखिने त्यो लाडो आफ्नो स्वास्नीको योनिमा भित्र बाहिर
गराउदै योनि र लाडो दुबै चुस्छन्। तारालाइ पनि यो निकै मनपर्छ। अरुबेला
मन नपराए पनि यो पोजिशनमा यदि भुषणले उनको मुखमै बीर्य निकाले पनि उनी
मज्जाले निलीदिन्छिन्।

यी सबै कुराहरु हप्तौं, महिनौंको राति रातिको मेसेन्जर च्याट पछि एक
अर्कालाइ आफ्ना अनुभवहरु सुनाउने क्रममा भुषणले सागरलाइ ब्यक्त गरेका
थिए। साँचै भेट अझसम्म नभएपनि मेसेन्जरमा नियमित भेट हुंदाहुंदै उनीहरु
वास्तबमै धेरै नजिकिसकेका थिए। आफ्नो यौनचाहनाहरु र अनुभवहरुको अब
निसंकोच आदानप्रदान हुन थालेको थियो। आफ्नो शरिरहरुको पुरा बयान विशेषगरि
उचाइ, तौल, स्तन र लिङ्गहरुको साइज, आकार, गुप्ताङ्गका रौं खौरिएको वा
नखौरिएको आदिको कुरा गर्दा गर्दा नदेखेपनि अर्को जोडी कस्तो देखिंदा हुन्
भन्ने पुरा अनुमान उनीहरुमा हुन थालिसकेको थियो। एक अर्कोको गोप्यतालाइ
कदर गरेर उनीहरुले आफ्नो अनुहार देखिने फोटोहरु भने अझसम्म देखाएका
थिएनन्। तर गुप्ताङ्गहरुको नजिकैबाट खिंचिएका close up फोटोहरु मात्र
होइन योनिमा लाडो पस्दै गरेको सफा डिजिटल फोटोहरु पनि अब आदान प्रदान
हुनथालिसकेको थियो। भुषण र तारा दुबैको गुप्ताङ्गहरु सफाचट हुने गरी रौं
खौरिएको रहेछ। सागर र पार्वतीको भने कालो जंगल नै रहेछ। पछि ताराले
मेसेन्जरमा बाक्लो झ्याउ राम्रो नलागेको कमेण्ट गरे पछि सागरले पनि सफाचट
पारेको फोटो पठायो। चाकमा लाडो घुसाउँदा दुख्ने भएकोले भुषण र तारा
गुदामैथुन नगर्ने रहेछन्। तर सागर र पार्वती कहिलेकाहिं चाकमा पनि
चिक्दारहेछन्।

एक दिन भुषणले अलि भिन्न किसिमको फोटो पठायो। त्यो फोटोमा भाइब्रेटर लाडो
ताराको योनिमा घुसेको थियो भने भुषणको जिब्रोको टुप्पाले लाडो पसेकै
थाउँमै योनि छोइराखेको थियो। यस्ले उनीहरुको सम्बन्धलाइ अर्को चरणमा
पुय्राउन ठुलै सहयोग गय्रो। भयो के भने त्यो खेलौना लाडो सागर र
पार्वतीहरुलाइ पनि प्रयोग गर्न मन लाग्यो र भुषण र सागर भेटेर त्यो लिने
दिने कुरा भयो। दुबैको मोबाइल फोन नम्बरहरु सातासात भयो र पहिलो पल्ट
फोनमा उनीहरुको कुराकानी भयो। सुरुमा दुबैको आवाज अलि नर्भस भएजस्तो
लाग्थ्यो तर केहि बेरमै एकदम घनिष्ठ साथीहरु जस्तै कुरा हुन थाल्यो।
कुराकानीको अन्त्यतिर फोटोको फेरि कुरा भयो अनि बिना कुनै हिच्किचाहत
दुबैले (सागर र भुषणले) अनुहार देखिने साधारण फोटोहरु पथाए। “पहिले
देख्नुभएको थियो मलाइ?”, “खै देखे देखे जस्तो लाग्छ”। “anyway अब भेटे
पछि बढि चिनिन्छ नि”

र बेकरी क्याफेमा पहिलो भेट भयो सागर र भुषणको। कफी खाँदै बिभिन्न
कुराहरु भयो। हुन त कुराको विषय भने बढिनै प्रोजेक्ट र बिजनेशमा
केन्द्रित रह्यो। अनि अन्त्यमा मुख्य कुरा भयो – सागरले भुषणबाट एउता
प्याकेट पायो। “instruction पनि भित्र नै छ” भुषणले भन्यो। दुबै दंग परेर
छुट्टिए।

भुषणलाइ भेटेको त्यो सांझ सागर समाचार हेरे पछि संधैजसो आफ्नो कोठामा
गएको थियो। पार्वती आउन कति ढिलो गरे जस्तो उस्लाइ लागिराखेको थियो।
कामधन्दा भ्याएर छोरीलाइ हजुरआमाकहाँ सुताएर पार्वती पनि आइपुगिन्।
सागरले भाइब्रेटर तकिया मुनि लुकाएको थियो। दुबै जना बेडमा अंगालो मारेर
पल्टे पछि संधैजसो सागर पार्वतीको बुबु मुसार्न थाल्यो भने पार्वतीको हात
सिधै उसको कट्टुभित्रको लाडो समाउन पुग्यो। एकैक्षणमा दुबै नांगो भए। दुध
चुस्दै सागर बिस्तारै तलतिर लाग्यो र पार्वतीको योनि खान पुग्यो। आफुपनि
पछादि खुत्ता उथाएर आफ्नो लाडो पार्वतीको मुखमा लगिदियो। 69 पोजिसनमा
एकअर्कालाइ पुरै उत्तेजित गरेपछि सागर पल्टियो र पार्वतीलाइ उसको माथि
फेरि 69 पोजिसनमा तानेर पुय्रायो। जिब्रोले जिस्क्याउँदै गरेको पार्वतीको
पुतिमा संधैजस्तो उसको औंला घुसिराखेको थियो। उसले तकिया मुनिबाट त्यो
भाइब्रेटर झिक्यो र औंलाको थाउंमा त्यो मोटो लाडो घुसाएर भाइब्रेटरको
स्वीच अन गरिदियो।

पार्वतीलाइ अलि अचम्म लाग्यो र आफ्नो हात तल ल्याएर त्यसलाइ त्याप्प
समातेर माथि लगेर हेर्न लग्यो। अनि एक किसिमको हाँसो पनि चल्यो – कस्तो
साँचैको जस्तो, अनि कति मोटो नि! “हेर, साँचै नै पो ल्याएको रहेछ। लाज
लागेन तपाइलाइ उसंग भेट्दा?” अब कामभन्दा कुरा बढि हुनथाल्यो।
भाइब्रेटरलाइ साइडमा राखेर सोझो किसिमले पार्वतीको माथि चढेर बिस्तारै
बिस्तारै चिक्दै उनीहरु कुरा गर्दै थिए। निश्चय पनि ख्याल ख्यालमा
जिस्किएजस्तो थालेको कुरा आज धेरै अगादि पुगेको थियो र यस्ले दुबैलाइ
बढिनै गम्भीर बनाएको थियो। त्यो दिन (रात) भाइब्रेटरको खासै प्रयोग नै
भएन। सेक्स सकिए पछि धेरै बेर कुराकानी भयो। पार्वतीले भेटको सबै ब्यहोरा
सोधिन् – के के कुरा भयो, कस्तो ब्यबहार थियो आदि आदि। पछि दुबै निदाए।

राति एकचोटि पार्वती ब्युँझिइन् अनि फेरि सुत्न खोज्दा उनलाइ नीद आइरहेको
थिएन्। मनमा अनेकौं कुराहरु खेलिराखेको थियो। सागर त मस्तसंग सुतिराखेको
थियो। कता कता उनलाइ करिब दश बर्ष अगादिको जस्तो मनोदशाले पिरलिराखेको
थियो। उनी बाइस वर्षकि थिइन् जब उनले आफ्नो कुमारीत्व गुमाएकी थिइन्।
त्यो रात पनि उनी यसरी नै सुत्न सकेको थिएन। हुन त आज त्योबेला जस्तो
खासै केहि भैहालेको थिएन। सागरसंगको सेक्स त नियमित कुरा नै थियो तर आज
पटक पटक उनको सोचाइ कम्प्युटरमा देखेको भुषणको हाँसिराखेको सिङ्गल फोटोमा
गइराखेको थियो। प्रेमविबाह गरेर सागरबाहेक अरू कुनै केटासंग कहिल्यै
यौनसम्पर्क नगरेका पार्वतीको लागि पटक पटक भुषणको कल्पना आइराखेको उनकै
लागि पनि अचम्म थियो। निद्रा नलागेकोले कोल्टे फेर्दै उनी बेडको छेउ
पुगिन् । अनि अनायसै उनको हात बेडमुनि भएको भाइब्रेटरमा पय्रो। उनले बेड
छेउको बत्ती बालिन् र भाइब्रेटरलाइ नियालेर हेरिन्। कम्प्युटरमा देखेको
भुषणको लिङ्ग त्यहि जस्तो लाग्यो। अनि झतपत परपुरुषको लिङ्ग छोएको जस्तो
लागेर भाइब्रेटरलाइ फेरि बेडमुनि मिल्काइ दियो र बत्ती निभाएर फेरी
सुत्ने कोशिस गरिन् ।

क्रमश:
बाँकि तेश्रो भागमा

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