मैं à¤à¤• साधारण परिवार की लड़की हूà¤à¥¤ वाराणसी के à¤à¤• घनी आबादी में रहती हूà¤à¥¤ मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ सब वही शौक हैं जो à¤à¤• जवान लड़की के होते हैं। मेरे परिवार में बस मेरी मां है, पिता की याद मà¥à¤à¥‡ नहीं है, मैं जब बहà¥à¤¤ छोटी थी वो à¤à¤• हादसे में गà¥à¤œà¤° गये थे। मेरे पड़ोस के ही à¤à¤• लड़के से मैं पà¥à¤¯à¤¾à¤° करती थी।
उसका नाम राहà¥à¤² था, उसके पिता अपनी à¤à¤• दà¥à¤•ान चलाया करते थे, जिससे उनकी अचà¥à¤›à¥€ आमदनी हो जाती थी। राहà¥à¤² की मां नहीं थी। राहà¥à¤² बड़ा शरà¥à¤®à¥€à¤²à¤¾ लड़का था, उसने मà¥à¤à¥‡ कà¤à¥€ हाथ à¤à¥€ नहीं लगाया था। उसके पिता कà¤à¥€ कà¤à¥€ मेरे घर आते थे, मेरी मां से उनकी अचà¥à¤›à¥€ दोसà¥à¤¤à¥€ थी। वो मेरी मां के साथ सेकà¥à¤¸ समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ à¤à¥€ रखते थे। मेरी माठमौका पा कर उनसे चà¥à¤¦à¤µà¤¾ लेती थी। मैं उनके इस समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ के बारे में कà¥à¤› नहीं कहती थी। पर à¤à¤¸à¤¾ सोच कर कि मां कैसे चà¥à¤¦à¤µà¤¾à¤¤à¥€ होगी, उनका लणà¥à¤¡ कैसा होगा, मेरे मन à¤à¥€ चà¥à¤¦à¤¾à¤¨à¥‡ की इचà¥à¤›à¤¾ होने लगती थी। मेरी चूत चà¥à¤¦à¤¾à¤¸à¥€ हो उठती थी। पर चà¥à¤¦à¤¤à¥€ कैसे, मौका ही नहीं मिलता था।
मà¥à¤à¥‡ à¤à¤• दिन मौका मिल गया। मेरी माठमामा जी के यहां दो दिन के लिये गई हà¥à¤ˆ थी। रात को मैं अकेली सेकà¥à¤¸ के बारे में सोच कर उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ हो रही थी। मेरा जिसà¥à¤® वासना में जलने लगा था। मेरी चूत में पानी आने लग गया था। मैं बैचेन हो उठी। मैंने चूत में घà¥à¤¸à¤¾à¤¨à¥‡ के लिये यहा वहा कà¥à¤› ढूंढा तो à¤à¤• लमà¥à¤¬à¤¾ वाला बैंगन मिल गया। कपड़े उतार कर मैंने उसे धीरे से चूत से लगाया कि मà¥à¤à¥‡ राहà¥à¤² का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ आ गया। मैंने अपना मोबाईल उठाया और उसे घर आने को कहा। मैंने बस अपने ऊपर à¤à¤• लमà¥à¤¬à¤¾ कà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾ डाल लिया कि नंगापन छिप जाये।
वो छत के रासà¥à¤¤à¥‡ दबे पांव नीचे आ गया। उसे देख कर मैं खà¥à¤¶ हो गई। वो à¤à¥€ बनियान और पजामें में था।
à¤à¤¸à¥€ हालत में मैंने उसे पहली बार देखा था। उसका शरीर बलिषà¥à¤ था, मसलà¥à¤¸ किसी पहलवान की तरह उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ थी।
“इतनी रात को….कà¥à¤¯à¤¾ बात है…. कोई परेशानी है कà¥à¤¯à¤¾ ?”
“हां राहà¥à¤², अकेले डर लगता है, तà¥à¤® रात को यहीं रह जाओ।”
“तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ साथ…. यानी लड़की के साथ…. तà¥à¤® ठीक तो हो ना?”
” राहà¥à¤² पà¥à¤²à¥€à¤œ, मैं नीचे सो जाउनà¥à¤—ी, तà¥à¤® यहाठसो जाना !”
वो सोच में पड़ गया, फिर बोला – “ठीक है मैं अà¤à¥€ आता हूà¤, ऊपर लाईट बनà¥à¤¦ करके ये आया।”
कà¥à¤› ही देर वो वापिस आ गया।
“आ जाओ, इसी पलंग पर आ जाओ, अà¤à¥€ बातें करेंगे, जब नींद आयेगी तो मैं नीचे सो जाउंगी”
हम दोनों à¤à¤• ही पलंग पर पà¥à¤¯à¤¾à¤° की बातें करने लगे। मà¥à¤à¥‡ उसका साथ पा कर तरावट आने लगी। मैं पानी लाने के बहाने उसे अपना बदन दिखाने लगी। कà¤à¥€ अपनी छातियाठउà¤à¤¾à¤° कर उसे रिà¤à¤¾à¤¤à¥€ और कà¤à¥€ अपने चूतड़ों को उसके सामने मटकाती। परिणाम सà¥à¤–द रहा। आखिर उसके लणà¥à¤¡ का उà¤à¤¾à¤° पजामे में से उठकर दिखने लगा।
उसकी आंखो में वासना के डोरे खिंचने लगे। मैंने कमान और कस ली और à¤à¤• बार नाटक करके अपनी सà¥à¤¡à¥Œà¤² चूतड़ की गोलाईयां कà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾ ऊपर करके अनजान बनते हà¥à¤¯à¥‡ दिखा ही दी। उसका लणà¥à¤¡ कड़क हो कर पजामे में से बाहर आने की कोशिश करने लगा। मà¥à¤à¥‡ अब पता चल गया था कि आज मेरी रात रंग à¤à¤°à¥€ होने वाली है।

मैं टीवी के पास खड़ी थी। राहà¥à¤² मेरे पास पीछे आ चà¥à¤•ा था। उसने मेरी पीठपर हाथ रख दिया। कà¥à¤› होने की आशंका से मेरा मन सिहर उठा। उसने धीरे से मेरी कमर में अपना हाथ कस लिया। उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ से मेरी आंखें बनà¥à¤¦ होने लगी। उसका शरीर मेरी पीठसे चिपक गया।
“ठराहà¥à¤², कà¥à¤¯à¤¾ कर रहे हो…. तà¥à¤® वहाठबैठो” अब मेरा शरीफ़ों जैसा नाटक आरमà¥à¤ हो गया।
“नहीं मधà¥, मà¥à¤à¥‡ अचà¥à¤›à¤¾ लग रहा है….” उसके हाथ अब मेरी छातियों की तरफ़ बढने लगे थे।
“सà¥à¤¨à¥‹, तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ मन मैला तो नहीं हो गया है ना….” मैंने उसकी वासना को उà¤à¤¾à¤°à¤¾à¥¤
“मत पूछो मधà¥, तà¥à¤® हो ही इतनी सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° कि…. बस पà¥à¤²à¥€à¤œ….” उसके हाथ मेरे उà¤à¤¾à¤°à¥‹ पर आ चà¥à¤•े थे। मन कर रहा था कि हाय ….बस अब मसल दे….
“राहà¥à¤² मत करो पà¥à¤²à¥€à¤œ, हाथ हटा लो….” मैंने अपने दोनो हाथ उसके हाथों पर रख दिये पर हटाये नही। उसके हाथ मेरी छातियों को कसने लगे।
“हाय कितने कठोर और मसà¥à¤¤ हैं….”
“चलो हटो….” मैंने उसके हाथ हटाये और छिटक कर दूर हट गई,”राहà¥à¤², à¤à¤¸à¥‡ नहीं….शादी के बाद….”
“अरे सॉरी, पता नहीं मà¥à¤à¥‡ कà¥à¤¯à¤¾ हो गया था।” उसने तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ माफ़ी मांग ली और हम फिर से बिसà¥à¤¤à¤° पर लेट कर टीवी देखने लगे। अचानक रहà¥à¤² ने लेटे लेटे ही मà¥à¤à¥‡ दबोच लिया और अपने होंठमेरे होंठो से चिपका दिये और मेरे ऊपर चढ़ गया। मैं मसà¥à¤¤ हो उठी कि अपने आप लाईन पर आ गया। मेरा कà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾ ऊपर उठा दिया और पजामे में खडा लणà¥à¤¡ मेरी चूत से चिपका दिया।
“राहà¥à¤²….ये कà¥à¤¯à¤¾…. हट जा…. देख मेरा कà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾ ऊपर हो गया है।”
“मधà¥, पजामा à¤à¥€ मैंने उतार दिया है, बराबर हो गया ना।”
उसका नंगा लणà¥à¤¡ मेरी चूत से रगड़ खाने लगा। मैंने à¤à¥€ चूत को उà¤à¤¾à¤° कर उसके लणà¥à¤¡ को बà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¾ दिया कि मैं तैयार हूà¤à¥¤
“मधà¥, तà¥à¤® सच में कà¥à¤¦à¤°à¤¤ की à¤à¤• कला हो, à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾ जिसà¥à¤®, पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ उà¤à¤¾à¤°, और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ ये पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ सी मà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾….”
कहते हà¥à¤¯à¥‡ उसने अपना लणà¥à¤¡ मेरी नई नवेली चूत कà¥à¤‚वारी चूत में घà¥à¤¸à¤¾ डाला।
“मैया री…. मैं मर गई….धीरे से….” मà¥à¤à¥‡ तेज दरà¥à¤¦ हà¥à¤†à¥¤ शायद मेरा कà¥à¤‚वारापन जाता रहा था। à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ शायद फ़ट चà¥à¤•ी थी। उसके मà¥à¤à¤¹ से à¤à¥€ à¤à¤• हलà¥à¤•ी कराह निकल गई। शायद राहà¥à¤² के लनà¥à¤¡ की सà¥à¤•िन à¤à¥€ फ़ट गई थी। पर जोश में लणà¥à¤¡ घà¥à¤¸à¤¤à¤¾ ही चला गया। हम दोनों ने à¤à¤• दूसरे को समाहित कर लिया था। अब हम रà¥à¤•े रहे…. और अपने आप को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करते रहे। फिर धीरे से à¤à¤• धकà¥à¤•ा और लगाया। मैं फिर से चीख उठी। उसने मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤¯à¤¾à¤° से निहारा और चूमने लगा।
“तà¥à¤® मेरी जान हो मधà¥, मेरा पà¥à¤¯à¤¾à¤° हो, तà¥à¤®à¥à¤¹à¤°à¥‡ बिना मैं जी नहीं सकता।”
“मेरे राजा, मेरे तà¥à¤® ही सब कà¥à¤› हो, मà¥à¤à¥‡ और पà¥à¤¯à¤¾à¤° करो, मà¥à¤à¥‡ जनà¥à¤¨à¤¤ में पहà¥à¤‚चा दो”
उसने अब धीरे धीरे मà¥à¤à¥‡ चोदना चालू कर दिया। मेरी चूत à¤à¥€ का दरà¥à¤¦ à¤à¥€ अब शनै: शनै: कम होने लगा। उसकी रफ़à¥à¤¤à¤¾à¤° बढ़ती गई। मैं अब सà¥à¤– के सागर में गोते खाने लगी। मेरी कमर à¤à¥€ अब उछाल मार रही थी। लणà¥à¤¡ पूरी गहराई तक मà¥à¤à¥‡ चोद रहा था। जाने कब मैं सà¥à¤– के सागर में बह गई और मेरी जवानी में उबाल आ गया, और यौवन रस छलक उठा, मेरी चूत à¤à¥€ उसके वीरà¥à¤¯ से लबालब à¤à¤° उठी। हम निढाल हो कर शिथिल पड़ गये।
पर कितनी देर तक पड़े रहते, कामदेव के तीर पर तीर चल रहे थे, जवानी ने फिर अनà¥à¤—ड़ाई ली और दूसरा दौर आरमà¥à¤ हो गया। फिर से हम à¤à¤• दूसरे में समाने लगे, इस बार की चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ पहले से लमà¥à¤¬à¥€ और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सà¥à¤–द थी।
रात à¤à¤° जाने दौर चल चà¥à¤•े थे, सवेरे होते होते राहà¥à¤² चला गया। मेरा मन शानà¥à¤¤ था, गहरे समà¥à¤‚दर की तरह कोई हलचल नहीं थी। मैं गहरी नींद में डूबती चली गई।
आंख खà¥à¤²à¥€ तो दिन के गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹ बज रहे थे। चादर में लगा खून सूख चà¥à¤•ा था। मेरे बदन में à¤à¥€ वीरà¥à¤¯ और खून के सूखे निशान चिपक गये थे। मैं तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ उठी पर जिसà¥à¤® दà¥à¤– रहा था, टूट रहा था, à¤à¤•दम से मैं लड़खड़ा गई। मैंने चादर बिसà¥à¤¤à¤° पर से खींच ली और लेकर बाथ रूम में आ गई। मैं अचà¥à¤›à¥€ तरह से नहाई और कपड़े साबà¥à¤¨ के पानी में à¤à¤¿à¤—ा दिये।
माठआ चà¥à¤•ी थी। मेरी नजरों की चोरी छà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥‡ नहीं छà¥à¤ª रही थी। मां की अनà¥à¤à¤µà¥€ आंखों ने सब कà¥à¤› à¤à¤¾à¤‚प लिया था। उस दिन तो वो कà¥à¤› नहीं बोली पर मैं समठचà¥à¤•ी थी कि मां को शक हो गया है। मैंने रात को मां से लिपट कर धीरे धीरे सब बात बता दी। मां को राहà¥à¤² के बारे में जब पता चला तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने चैन की सांस ली।
राहà¥à¤² के पापा को मनाना मां के लिये सरल था कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि माठऔर उसके पिता का तो चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ का कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® चलता रहता था।
हमारा सचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤¯à¤¾à¤° रंग लाया और सब कà¥à¤› ठीक हो गया। à¤à¤• दिन शादी का समय à¤à¥€ आ गया। इस बीच राहà¥à¤² और मैं कई बार चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ कर चà¥à¤•े थे यानी बहà¥à¤¤ सी सà¥à¤¹à¤¾à¤— रातें मना चà¥à¤•े थे। ठीक समय पर हमारे घर अब à¤à¤• लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ ने जनà¥à¤® लिया। हमारी अधूरी जिनà¥à¤¦à¤—ी पूरà¥à¤£ हो गई।
कà¥à¤µà¥ˆà¤¤ से राहà¥à¤² को काम करने का à¤à¤• सà¥à¤¨à¤¹à¤°à¤¾ अवसर आया। और कà¥à¤› समय के बाद वो कà¥à¤µà¥ˆà¤¤ चला गया। उसकी अचà¥à¤›à¥€ कमाई थी। मेरा घर à¤à¤°à¤¨à¥‡ लगा पर मन खाली खाली रहने लगा। वो साल साल à¤à¤° बाद आता था। मेरी शरीर की आवशà¥à¤¯à¤•ताओं को à¤à¥€ नजर अनà¥à¤¦à¤¾à¤œ करने लगा, शायद पैसा ही अब उसके लिये सबकà¥à¤› हो गया था। अब मेरा मन à¤à¤Ÿà¤•ने लग गया था। राहà¥à¤² के पिता अब रात à¤à¥€ माठके साथ बिताने लगे थे। मैं à¤à¥€ रात को लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ के सोने के बाद उनकी चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ को कैसे ना कैसे करके चोरी से देखती थी, और रात à¤à¤° तड़पती रहती थी। कà¤à¥€ कà¤à¥€ तो मैं खूब रोती और फिर ये सोच कर रह जाती कि राहà¥à¤² ने मेरे लिये कितना कà¥à¤› किया।
पर à¤à¤• दिन à¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† कि ……..

दिन को मैं अपने कमरे में आराम कर रही थी, à¤à¤• à¤à¤ªà¤•ी लगी ही थी कि किसी ने मà¥à¤à¥‡ दबोच लिया। सà¥à¤–द आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ से मैंने आंखे नहीं खोली। शायद à¤à¤—वान ने मेरी सà¥à¤¨ ली थी। उसके हाथ मेरी सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ पर आ कर उसे दबाने लगे। जिसà¥à¤® रोमांच से à¤à¤° उठा। ये रेगिसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में हरियाली कैसी? पर आंख खà¥à¤²à¤¤à¥‡ ही मेरी चीख निकल पड़ी।
वो राहà¥à¤² के पिता बाबू जी थे…. मातà¥à¤° चडà¥à¤¡à¥€ में थे, उनका लणà¥à¤¡ फ़à¥à¤«à¤¼à¤•ारें à¤à¤° रहा था, उनकी आखे वासना में डूबी हà¥à¤ˆ थी….
मैंने उनà¥à¤¹à¥‡ धकेलेते हà¥à¤ कहा,”बाबू जी….ये कà¥à¤¯à¤¾ कर रहे है आप….!”
“à¤à¥‹à¤¸à¤¡à¤¼à¥€ की, चूत सूख जायेगी, चà¥à¤¦à¤µà¤¾ ले….!”
मैं उनकी à¤à¤¾à¤·à¤¾ पर सनà¥à¤¨ रह गई, ये कà¥à¤¯à¤¾ कह रहे हैं !
“बाबू जी, मैं तो आपकी बहू हूअ. à¤à¤¸à¤¾ ना करिये !” मैंने उनसे पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की।
“साली हराम जादी, तेरी मां को चà¥à¤¦à¤¤à¥‡ हà¥à¤ रोज देखती है, और छिनाल अपनी चूत को हाथ से घिसती है, बाबू जी मर गये थे कà¥à¤¯à¤¾ ?”
अब वो मेरा पेटीकोट खींच रहे थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी चडà¥à¤¡à¥€ उतार फ़ेंकी और मà¥à¤à¥‡ चूमने लगे। उनका मोटा लौड़ा उछल कर बाहर आ गया। मेरी चूंचियाठसहलाने और दबाने लगे। उनका लणà¥à¤¡ तो बहà¥à¤¤ ही मोटा और लमà¥à¤¬à¤¾ था। मेरी वासना जागने लगी। लमà¥à¤¬à¥‡ इनà¥à¤¤à¤œà¤¼à¤¾à¤° के बाद मेरी इचà¥à¤›à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही à¤à¤¸à¤¾ मसà¥à¤¤ लणà¥à¤¡ मिल रहा। उसे हाथ में लेने की इचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¤¬à¤² हो उठी। मैंने शरम छोड़ कर उनका लणà¥à¤¡ पकड़ लिया।
“ये हà¥à¤ˆ ना बात, मेरी जान, ले ले मेरा लौड़ा ले ले, चà¥à¤¦à¤µà¤¾à¤²à¥‡ à¤à¥‹à¤¸à¤¡à¤¼à¥€ की….”
“बाबू जी मेरी à¤à¥€ गाली देने की इचà¥à¤›à¤¾ हो रही है, दूं कà¥à¤¯à¤¾ मादरचोद गाली तà¥à¤à¥‡ ?”
“मेरी रणà¥à¤¡à¥€, तेरी मां को चोदूं, दे मà¥à¤à¥‡ दे गाली, हरामी, दे गाली, मजा आयेगा।”
“तो à¤à¥‡à¤¨ चोद मार दे मेरी फ़à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€ को, साला मà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤£à¥à¤¡à¤¾ लौड़ा, घà¥à¤¸à¥‡à¤¡à¤¼ दे मेरी à¤à¥‹à¤¸à¤¡à¤¼à¥€ में….” मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ आज मौका मिल गया मन की à¤à¤¡à¤¼à¤¾à¤¸ निकालने का। मà¥à¤à¥‡ पता था इतना मोटा लणà¥à¤¡ मà¥à¤à¥‡ मसà¥à¤¤ करने वाला है। माठकी किसà¥à¤®à¤¤ पर मैं जलने लगी कि इतने सोलिड लणà¥à¤¡ से चà¥à¤¦à¤µà¤¾à¤¤à¥€ रही और मà¥à¤à¥‡ पूछा तक नहीं। मैं तो राहà¥à¤² के दà¥à¤¬à¤²à¥‡ पतले लणà¥à¤¡ से ही सनà¥à¤¤à¥à¤·à¥à¤Ÿ थी, मेरी मां कितनी खà¥à¤¦à¤—रà¥à¤œ है चà¥à¤¦à¤µà¤¾à¤¨à¥‡ के मामले में….।
मेरी चूत को देखते हà¥à¤ बोले,“ हाय रे मेरी बेटी, इतनी सी मà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ है रे तेरी तो….और पोंद इतने से?â€
“बाबूजी, आज कल लडकियाठइतनी ही नाजà¥à¤• होती हैं†मेरी गाणà¥à¤¡ को टटोलते हà¥à¤ अपना हाथ फ़ेरने लगे।
“मेरी लाडो, जरा गाणà¥à¤¡ तो मेरी तरफ़ कर, इसका à¤à¥€ मजा ले लूं जरा !â€
मैं उलà¥à¤Ÿà¥€ हो कर घोड़ी जैसी हो गई और अपने चूतड़ पूरे उà¤à¤¾à¤° दिये। बाबू जी का लणà¥à¤¡ तनà¥à¤¨à¤¾ उठा मेरी गोल गोल गाणà¥à¤¡ देख कर। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पास पड़ी कà¥à¤°à¥€à¤® उठाई और मेरी गाणà¥à¤¡ में à¤à¤° दी।
“बाबू जी कà¥à¤¯à¤¾ कर रहे हो…. मेरी तो छोटी सी गाणà¥à¤¡ है, अचà¥à¤›à¥€ है ना?â€
“मसà¥à¤¤ है रे, साली को मचकाने को मन कर रहा है।†और उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ अपनी à¤à¤• अंगà¥à¤²à¥€ मेरी गाणà¥à¤¡ में डाल दी। हलà¥à¤•ा सा मजा आया।
“हाय रे बाबू जी, मà¥à¤à¥‡ अपनी लौंडी बना लो, अपने पास ही रख लो।â€
“हाठमेरी मधॠरानी, तॠबहà¥à¤¤ ही सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° है, तेरा हर अंग नाजà¥à¤• है।â€
“मà¥à¤à¥‡ आपकी दासी बना लो, मà¥à¤à¥‡ बस चोद डालो अपने मोटे लणà¥à¤¡ से, देखो चूत कितनी पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ हो रही है।â€
“शाबाश बेटी…. ये हà¥à¤ˆ ना बात…. अब देख मैं तà¥à¤à¥‡ कैसा मसà¥à¤¤ करता हूंâ€
मेरी गाणà¥à¤¡ की दोनों गोलाईयों को वो सहलाने लगे और उनका मोटा लणà¥à¤¡ गाणà¥à¤¡ के छेद पर लग गया। मैं घबरा उठी, इतनी छोटी सी गाणà¥à¤¡ में इतना मोटा लणà¥à¤¡à¥¤ मेरी तो मां चà¥à¤¦ जायेगी …. मैंने पीछे मà¥à¤¡à¤¼ के देखा, बाबूजी का चेहरा वासना से लाल हो उठा था, उनका लणà¥à¤¡ गाणà¥à¤¡ देख कर कड़क उठा था।

मैंने जलà¥à¤¦à¥€ से अपनी गाणà¥à¤¡ को उनके सामने से हटाने की कोशिश की पर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने हाथों से मेरी कमर कस के थाम ली। लणà¥à¤¡ का सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ चिकनाई लगी गाणà¥à¤¡ के छेद पर आ टिका था। अब बाबू जी ने जोर लगाया तो लणà¥à¤¡ नीचे फ़िसल पड़ा।
“ बाबू जी…. ये नहीं करो, नहीं जायेगा।†पर दूसरी बार में मेरी गाणà¥à¤¡ के छेद को फ़ैलाते हà¥à¤ सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ अनà¥à¤¦à¤° घà¥à¤¸ पड़ा। मैं चीख पड़ी।
“अरे फ़ाड़ डाली रे मेरी गाणà¥à¤¡, मादरचोद…. छोड मà¥à¤à¥‡, हाय रे बाबू जी !” बाबू जी का सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ मेरी गाणà¥à¤¡ को चीरता हà¥à¤† गहराई नापने लगा।
“बिटिया, इतनी पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ पोनà¥à¤¦ को मारी नह॥न, तो फिर कà¥à¤¯à¤¾ मजा आयेगा।”
“साले, हरामी, निकाल दे रे लणà¥à¤¡ को बाहर…. मेरी माठको फोड़ जा कर ….” मà¥à¤à¥‡ असीम दरà¥à¤¦ होने लगा। à¤à¤²à¤¾ हो चिकनाई का जो लणà¥à¤¡ को अनà¥à¤¦à¤° बाहर करने में मदद कर रही थी।
“अब शानà¥à¤¤ हो जा मोड़ी, गाणà¥à¤¡ तो मैं छोड़ूंगा नही…. चल à¤à¥‹à¤¸à¤¡à¤¼à¥€ की और à¤à¥à¤• जा….” मेरी पीठको हाथ से दबा कर à¤à¥à¤•ा दिया और लणà¥à¤¡ पेलने लगा। मैं चीखती रही…. उसका लौड़ा अब ठीक से गाणà¥à¤¡ में सेट हो गया था और गाणà¥à¤¡ को चीरता हà¥à¤† मजा ले रहा था। मेरे आंसू निकल पड़े…. दरà¥à¤¦ के मारे मैं लसà¥à¤¤ हो गई। मà¥à¤à¤¹ से आवाज तक निकलना बंद हो गई। मैं अपनी पोंद ऊपर उठाये अपने गाणà¥à¤¡ के छेद को जितना हो सके ढीला करने की कोशिश करती रही ताकि दरà¥à¤¦ कम हो। उनके धकà¥à¤•े बढ़ते गये…. मेरी चीखें हालांकि कम हो गई थी पर धकà¥à¤•े के साथ कराह निकल ही जाती थी।
“आज तो मसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ गाणà¥à¤¡ का मजा आ गया…. मोड़ी तेरी पोंद तो मजे की है…. देख दो दिन में इसे मेरे लौड़े की साईज़ का कर दूंगा।”
मà¥à¤à¥‡ कà¥à¤› सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ नहीं दे रहा था। अचानक बाबू जी ने लौड़े का पूरा जोर मेरी ग़ाणà¥à¤¡ में लगा दिया और मैं फिर से à¤à¤• बार चीख उठी…. बाबू जी का बदन का कसाव बढ गया और अचानक मà¥à¤à¥‡ गाणà¥à¤¡ के अनà¥à¤¦à¤° पानी à¤à¤°à¤¤à¤¾ सा लगा। बाबू जी ने अपना लणà¥à¤¡ बाहर निकाल लिया और पिचकारी हवा में उछाल दी। ढेर सारा वीरà¥à¤¯ लणà¥à¤¡ ने छोड़ दिया और मेरी पीठपूरी चिकनी हो उठी। वीरà¥à¤¯ गाणà¥à¤¡ के छेद में और पीठपर फ़ैल गया था। मà¥à¤à¥‡ अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ सà¥à¤–द पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ हà¥à¤† कि इतने मोटे लणà¥à¤¡ से निजात मिली। मैं बिसà¥à¤¤à¤° से लग गई और आंखे बंद कर ली और गहरी सांसें लेने लगी। बाबूजी ने चादर से ही अपना वीरà¥à¤¯ साफ़ कर दिया।
“चà¥à¤¦ गई मेरी बेटी…. मधॠमजा आया ना?” मां ने कमरे में आते हà¥à¤ कहा।
“हाठमेरी बिटिया…. तेरी माठही ने मà¥à¤à¥‡ तà¥à¤à¥‡ चोदने के लिये कहा था, तेरी तड़प इससे सही नहीं जा रही थी।” बाबू जी ने रहसà¥à¤¯ खोला। मैं चौंक उठी, पर मां ने मेरी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखा, मà¥à¤à¥‡ बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ लगा।
” मां, आप मेरा कितना धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखती हैं …. पर देखो ना बाबू जी ने मेरे साथ कà¥à¤¯à¤¾ किया !” मैंने शिकयत की और अपनी पोंद दिखाई।
“अरे मादरचोद, मेरी बेटी की तो तूने गाणà¥à¤¡ मार दी, अपने मोटे लणà¥à¤¡ का खà¥à¤¯à¤¾à¤² तो रखा होता….” माठने गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ होते हà¥à¤ कहा।
“मैं कà¥à¤¯à¤¾ करूà¤, तेरी बेटी की पोंद इतनी मसà¥à¤¤ थी कि उसे मारनी पड़ी, मेरा लौड़ा à¤à¥€ तो साला गाणà¥à¤¡ देख कर à¤à¤¸à¤¾ à¤à¤¡à¤¼à¤• उठता है कि बस….” बाबू जी ने अपनी मजबूरी जताई।
“साला कमीना, देख गाणà¥à¤¡ की कà¥à¤¯à¤¾ हालत कर दी है….”
“छोड़ ना मां, चाहे लगी हो, पर बाबू जी का लणà¥à¤¡ मसà¥à¤¤ है…. अब तो मैं रोज ही चà¥à¤¦à¤¾à¤Šà¤‚गी।” मैंने मां को समà¤à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ चाहे जो हो बाबू जी का लणà¥à¤¡ मसà¥à¤¤ था, उसे मैं कैसे छोड़ती।
मां ने मà¥à¤à¥‡ गले लगा लिया…. “मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ तो इनके लणà¥à¤¡ का चसà¥à¤•ा लगा हà¥à¤† है ना…. साला à¤à¤°à¤ªà¥‚र चोदता है….मसà¥à¤¤ कर देता है”
बाबू जी अपनी तारीफ़ सà¥à¤¨ कठइतराये जा रहे थे…. और फिर उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ मां को दबोच लिया। और उसके ऊपर चढ़ गये।
रंडी, अब उठा ले अपनी टांग…. लौड़ा तैयार है….” मां कसमसाती रही पर चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ चालू हो गई थी। मां नीचे दबी हà¥à¤ˆ सिसकारियाठà¤à¤° रही थी, और बाबू जी चोदते रहे…….. पेलते रहे…. मां की चà¥à¤¦à¤¤à¥€ रही, मैं मां को मसà¥à¤¤ होते देखते रही….
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मैं उस समय कॉलेज में पढ़ती थी। मेरा à¤à¤• बॉय-फ़à¥à¤°à¥‡à¤‚ड था सà¥à¤§à¥€à¤°, जो मेरा कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤®à¥‡à¤Ÿ था। मेरे और उसके बीच समà¥à¤¬à¤‚ध तीन महीने से था। सà¥à¤§à¥€à¤° à¤à¤• छà¥à¤¹ फ़à¥à¤Ÿ का खूबसूरत लड़का था। साफ़, गोरा रंग पर पढ़ने में कोई खास नहीं था, à¤à¤• औसत विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ था।
मैं अपनी सà¥à¤•ूटी से कॉलेज जा रही थी, तà¤à¥€ सà¥à¤§à¥€à¤° ने आवाज लगाई,”कामिनी…. à¤à¤• मिनट…….. !”
मैंने पलट कर देखा तो सà¥à¤§à¥€à¤° दूर पान की दà¥à¤•ान पर कà¥à¤› लड़कों के साथ खड़ा था, जो पहनावे से ठीक नहीं लग रहे थे। सà¥à¤§à¥€à¤° à¤à¤¾à¤—ता हà¥à¤† आया
“सà¥à¤¨à¥‹ …. आज तो मैं कॉलेज नहीं जाउंगा…. पर कल सà¥à¤¬à¤¹ जरूर मिलना….!”
“कà¥à¤¯à¥‹à¤‚….कल कà¥à¤¯à¤¾ है?…. और ये लड़के कौन हैं जो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ साथ हैं….?”
“परसों मेरी बहन और मां आ रही हैं…. कल घर में कोई नहीं है…. गपà¥à¤ªà¥‡ मारेंगे …. फिर परसों के बाद कोई चांस नहीं है….!”
“सच…. तो कल कॉलेज…. गोल….!! ” मैंने अपनी सà¥à¤•ूटी आगे बढ़ा दी….वो वापिस अपने दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में चला गया। उसका घर यहां से पास ही था। मैं खà¥à¤¶ हो गई, काफ़ी दिनो बाद सà¥à¤§à¥€à¤° ने अपने घर आने को कहा था। मैं कॉलेज में à¤à¥€ और फिर घर पर à¤à¥€ अपने और सà¥à¤§à¥€à¤° के बारे में सोचती रही। मà¥à¤à¥‡ यह सोचना बड़ा अचà¥à¤›à¤¾ लग रहा था कि हम अकेले में कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ बातें करेंगे। कहीं अकेले में वो मà¥à¤à¥‡ छेड़ेगा तो नहीं…. कà¥à¤¯à¤¾ करेगा …. और मैं उसके साथ पà¥à¤¯à¤¾à¤° कैसे करूंगी…. सोचते हà¥à¤ ही रोंग़टे खड़े हो रहे थे….।
दूसरे दिन सà¥à¤§à¥€à¤° उसी पान वाले की दà¥à¤•ान के सामने मिल गया…. वही अपने कà¥à¤› अजीब से दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के साथ। मà¥à¤à¥‡ देख कर वो à¤à¤¾à¤—ता हà¥à¤† आया और मेरी सà¥à¤•ूटी पर बैठगया।
“पीछे मà¥à¤¡à¤¼à¥‹ और सामने वाला घर मैंने किराये पर ले रखा है….!”
मैं उस घर में à¤à¤• बार पहले à¤à¥€ आ चà¥à¤•ी थी। पर उस समय उसकी मां और बहन à¤à¥€ थी। मैंने अनà¥à¤¦à¤° सà¥à¤•ूटी रखी इतनी देर में सà¥à¤§à¥€à¤° ने घर का ताला खोल दिया। अब हम दोनों घर के अनà¥à¤¦à¤° थे। अनà¥à¤¦à¤° आते ही उसने मà¥à¤à¥‡ चूतड़ों के नीचे से हाथ का गà¥à¤°à¤¿à¤ª बना कर ऊपर उठा लिया। उसके मà¥à¤à¤¹ से बीड़ी की या कà¥à¤› और चीज़ की दà¥à¤°à¥à¤—ंध आई।
” छि: छि: अपना मà¥à¤à¤¹ धो कर आओ….बलà¥à¤•ि बà¥à¤°à¤¶ à¤à¥€ करो….!”
उसे मेरा कहना अचà¥à¤›à¤¾ नहीं लगा….पर उसने बà¥à¤°à¤¶ करके मà¥à¤¹ को साफ़ कर लिया।
“बस अब तो ठीक है ना….!” मà¥à¤¸à¥à¤•रा कर उसने अपनी बाहें फ़ैला दी। मैं उसके पास जाकर उससे लिपट गई।

“हां….अब देखो कितने अचà¥à¤›à¥‡ लग रहे हो….” मैंने उसे चूम लिया। à¤à¤•बारगी मà¥à¤à¥‡ लगा कि सà¥à¤§à¥€à¤° कोई नशा किये हà¥à¤ है। उसकी आंखो में मà¥à¤à¥‡ वासना के डोरे तैरते नजर आये। मà¥à¤ पर à¤à¥€ धीरे धीरे वासना क रंग चढ़ने लगा। हम à¤à¤• दूसरे को बà¥à¤°à¥€ तरह चूमने लगे। वो मेरे अंगों को दबाने लगा। मेरी चूंचियाठकड़ी हो गई। मैं मदहोश होने लगी। मेरी चूत गीली होने लगी थी।
“कामिनी…. आज कà¥à¤› करें…. मेरा मन बहक रहा है….!”
“मेरे राजा…. मेरा मन à¤à¥€ बहक रहा है…. कà¥à¤› करो ना….”
सà¥à¤§à¥€à¤° ने अपना हाथ मेरी टॉप के अनà¥à¤¦à¤° डाल दिया और मेरी चूंचियाठदबा दी। उसका लणà¥à¤¡ à¤à¥€ मà¥à¤à¥‡ चोदने के लिये उतावला हो रहा था। उसके कड़े लणà¥à¤¡ को मैंने अपने अपने हाथ में à¤à¥€à¤‚च लिया। उसके मà¥à¤– से आह निकल गई। मैं à¤à¥€ बेकाबू होती जा रही थी।
“….ये पैणà¥à¤Ÿ तो उतारो…. बड़ा तड़प रहा है बेचारा……..!”
सà¥à¤§à¥€à¤° ने अपना पैंट उतार दिया….फिर कमीज और बनियान à¤à¥€ उतार दिया। इतनी देर में मैंने à¤à¥€ अपनी जीनà¥à¤¸ उतार दी और टॉप à¤à¥€ उतार दिया। अब हम दोनों बिलà¥à¤•à¥à¤² नंगे खड़े थे। उसका शरीर देख कर मैं उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ हो उठी। खास करके उसका कठोर और तनà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ हà¥à¤† लणà¥à¤¡ देख कर मेरी चूत फ़ड़क उठी। उसके लणà¥à¤¡ को पकड़ कर सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¥‡ की चमड़ी मैंने ऊपर खींच दी। उसका लाल सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ चमक उठा। उसने अपने बिसà¥à¤¤à¤° पर मà¥à¤à¥‡ बैठा दिया…. फिर हम दोनों किस करते हà¥à¤ बिसà¥à¤¤à¤° की चौड़ाई पर लेट गये। मेरे मन में आननà¥à¤¦ की हिलौरे आने लगी, मैं मन ही मन में चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ के लिये बेताब हो उठी… मेरे दोनों पांव नीचे ही थे। सà¥à¤§à¥€à¤° ने नीचे खड़े हो कर ही अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया। मैंने अपनी चूत थोड़ी सी फ़ैला दी। उसने अपना लणà¥à¤¡ मेरी चूत पर रख दिया और हौले से अनà¥à¤¦à¤° घà¥à¤¸à¤¾ दिया। मैं आननà¥à¤¦ से à¤à¤° गई। उसने अब à¤à¤• ही धकà¥à¤•े में पूरा लणà¥à¤¡ अनà¥à¤¦à¤° घà¥à¤¸à¤¾ डाला। मà¥à¤à¥‡ थोड़ी सी तकलीफ़ हà¥à¤ˆ…. पर सहन कर गई।
“सà¥à¤§à¥€à¤°…. धीरे धीरे डालो ना….!”
पर वो अब कहां सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ वाला था। उसने तो à¤à¤•दम से ही तेज धकà¥à¤•े चालू कर दिये। मà¥à¤à¥‡ अब तो वासà¥à¤¤à¤µ में लगा कि वो नशे में है….उसके मà¥à¤– से अब कà¥à¤› तेज गनà¥à¤§ आने लगी थी। जो मेरे आननà¥à¤¦ को रोक रहा था। उसकी आà¤à¤–ों में लाल डोरे बढ़ गये थे। जाने मà¥à¤à¥‡ आज मजा नहीं आ रहा था। उसके चोदने में नरमाई बिलकà¥à¤² नहीं थी…. मà¥à¤à¥‡ तकलीफ़ à¤à¥€ हो रही थी…. । à¤à¤¸à¤¾ लगा कि ना जाने कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ आज सà¥à¤§à¥€à¤° बहà¥à¤¤ अधीर था और शायद जलà¥à¤¦à¥€ में नजर आ रहा था….
“सà¥à¤§à¥€à¤°…. रà¥à¤•ो…. कोई चिकनाई लगा लो….!”
पर उसकी सांस फूलने लगी थी….शायद वो थक गया था। अचानक ही उसका वीरà¥à¤¯ छूट पड़ा। और उसने मेरी चूत के अनà¥à¤¦à¤° ही वीरà¥à¤¯ छोड़ दिया।
कामिनी – 2
सà¥à¤§à¥€à¤° जैसे ही हटा मà¥à¤à¥‡ अचानक ही à¤à¤• चेहरा और दिखा…. वो à¤à¥€ नंगा खड़ा था और उसका लणà¥à¤¡ à¤à¥€ तनà¥à¤¨à¤¾ रहा था। उसने à¤à¤•दम से मà¥à¤à¥‡ जकड़ लिया। मेरी समठमें कà¥à¤› आता उसके पहले उसने मà¥à¤à¥‡ जकड़ लिया।
मैं अपने शरीर को à¤à¤Ÿà¤•े दे कर छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¨à¥‡ की कोशिश करने लगी। पर ये पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ बेकार साबित हà¥à¤†à¥¤ ना जाने वो कमरे में कब आया और उसने अपने खà¥à¤¦ के कपड़े कब उतार लिये, मà¥à¤à¥‡ पता ही नहीं चला। मैं तो सà¥à¤§à¥€à¤° की चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ का आननà¥à¤¦ ले रही थी, मेरी तो आंखे बनà¥à¤¦ थी…. ये कब आ गया …. तà¤à¥€ उसका लणà¥à¤¡ मेरी चूत में घà¥à¤¸à¤¤à¤¾ सा लगा…. उसका लणà¥à¤¡ बहà¥à¤¤ मोटा था…. à¤à¤Ÿà¤•े से उसने जोर का धकà¥à¤•ा मारा और उसका लणà¥à¤¡ मेरी चूत में घà¥à¤¸ गया। उसका लणà¥à¤¡ मोटा और खà¥à¤°à¤¦à¤°à¤¾ था। मेरी तंग चूत में उसका लणà¥à¤¡ रगड़ता हà¥à¤† गहराई तक बैठगया। मà¥à¤à¥‡ तेज दरà¥à¤¦ हà¥à¤†, मेरे मà¥à¤– से चीख निकल गई। उसी समय सà¥à¤§à¥€à¤° ने मेरे दोनों हाथ कस कर पकड़ लिये…. मà¥à¤à¥‡ कà¥à¤› समठमें नहीं आया….सब कà¥à¤› बà¥à¤°à¥‡ सपने जैसा लग रहा था।
कामिनी की इस घटना को दो दिन बीत गये थे। इन दो दिनों में मैं सà¥à¤§à¥€à¤° से दो बार मिल चà¥à¤•ा था। कामिनी के कारण उससे मेरी à¤à¥€ दोसà¥à¤¤à¥€ थी। मैंने उसे यह नहीं मालूम होने दिया कि कामिनी की चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ के बारे में मà¥à¤à¥‡ मालूम है। आज सवेरे ही मैंने सà¥à¤§à¥€à¤° के घर जाने की योजना बनाई। इस बारे में मैंने नेहा को बता दिया था कि सà¥à¤§à¥€à¤° की मां और बहन आई हà¥à¤ˆ हैं, उनसे मिलने जा रहा हूà¤à¥¤
मैं कॉलेज जाने से पहले उसके घर चला गया। बाहर बरामदे में à¤à¤• सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° सी लड़की à¤à¤¾à¤¡à¤¼à¥‚ लगा रही थी। मैंने अनà¥à¤¦à¤¾à¤œà¤¼à¤¾ लगाया कि यह सà¥à¥à¤§à¥€à¤° की बहन होगी। जैसे ही मैं फ़ाटक के अनà¥à¤¦à¤° घà¥à¤¸à¤¾ …. उसने मेरी तरफ़ देखा और देखती ही रह गई।
मैंने उसे नमसà¥à¤¤à¥‡ किया तो वो कà¥à¤› नहीं बोली। मैं सामानà¥à¤¯à¤¤à¤¯à¤¾ मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾ रहता हूà¤,”मैं सà¥à¤§à¥€à¤° का दोसà¥à¤¤ हूठ…. ”
“जी …. आईये …. ” वो कà¥à¤› शरमाती सी बोली। मà¥à¤à¥‡ वो अनà¥à¤¦à¤° ले गई और कहा – “आप बैठिये …. मैं पानी लाती हूà¤à¥¤”
“आप उसकी बहन है ना ….” मैंने मà¥à¤¸à¥à¤•राहट बिखेरते हà¥à¤ कहा।
वो à¤à¤•दम से शरमा गई …. और मà¥à¤à¥‡ तिरछी निगाहों से देखती हà¥à¤ˆ अनà¥à¤¦à¤° चली गई। उसकी पतली छरहरी काया और उसके उà¤à¤¾à¤° और कटाव à¤à¤°à¥‡ पूरे थे। किसी को à¤à¥€ अपनी ओर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ कर सकते थे। वो पानी ले कर आ गई।
“आपका नाम जान सकता हूठ….?”
उसका अनà¥à¤¦à¤¾à¤œà¤¼ कà¥à¤› अलग सा था। मà¥à¤à¥‡ लगा कि वो उमर में सà¥à¤§à¥€à¤° से बड़ी है।
इतने में à¤à¤• मधà¥à¤° अवाज और आई,”ये मेरी ममà¥à¤®à¥€ है …. मै सà¥à¤§à¥€à¤° की बहन हूठ…. दिवà¥à¤¯à¤¾ ….!”
मैं बà¥à¤°à¥€ तरह से चौंक गया …. ये कैसे हो सकता है? “जी ….माफ़ करना …. आप तो इतनी छोटी लगती है कि …. मैं तो समà¤à¤¾ कि ….!”
“आप ठीक कह रहे हैं …. मेरी कम उमà¥à¤° में ही शादी हो गई थी …. फिर ये à¤à¥€ à¤à¤• à¤à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤¨à¥à¤Ÿ में गà¥à¤œà¤° गये थे ….” (उसका मà¥à¤à¥‡ घूरना बनà¥à¤¦ नहीं हà¥à¤†à¥¤) वो à¤à¤•टक मà¥à¤à¥‡ देखे जा रही थी।
“ओह!!! …. माफ़ करना …. यह सà¥à¤¨ कर दà¥à¤– हà¥à¤† …. पर आप तो दिखने में किसी लड़की जैसी ही लगती हैं ….” वो फिर से शरमा गई ….
“आप चाय पीजिये …. इतने में सà¥à¤§à¥€à¤° आ जायेगा ….!” उसके हाव à¤à¤¾à¤µ ये बता रहे थे कि मैं उसे अचà¥à¤›à¤¾ लग रहा हूठ…. मैंने सोचा कि और आगे बढ़ा जाये !
“आप अà¤à¥€ ही इतनी सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° लग रही हैं तो जब बाहर जाती होगी तो और à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ लगती होंगी ….!” उसका चेहरा लाल हो उठा। बिलà¥à¤•à¥à¤² किसी कà¥à¤‚वारी लड़की की तरह वह अदाà¤à¤ दिखा रही थी। फिर से उसने मà¥à¤¸à¥à¤•राते हà¥à¤ मà¥à¤à¥‡ देखा …. मेरी हिमà¥à¤®à¤¤ बढ़ने लगी। वो सामने किचन में चली गई। मैं à¤à¥€ उसके पीछे पीछे किचन में आ गया।
मैंने हिमà¥à¤®à¤¤ करके उसकी कमर पर हाथ रखा। उसने तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ ही पलट कर मà¥à¤à¥‡ देखा और बोली- “यह कà¥à¤¯à¤¾ कर रहे रहे हो ….”
“सॉरी मैं अपने आपको रोक नहीं पाया, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आप में गजब का आकरà¥à¤·à¤£ है !”
वो मà¥à¤¸à¥à¤•रा दी। मेरी हिमà¥à¤®à¤¤ और बढ़ गई।
“आप बहà¥à¤¤ खूबसूरत हैं …. ” उसके चेहरे पर पसीन छà¥à¤²à¤• आया।
“आप à¤à¥€ तो हैं …. हाय” उसके मà¥à¤à¤¹ से निकल पड़ा। मेरे हाथ उसकी चिकनी कमर पर फ़िसलने लगे। उसका शरीर कांप उठा, वो लरजने लगी और à¤à¥‚ठमें ही मेरे से दूर होने की कोशिश करने लगी।
“जी ….चाय ….” उसका चेहरा तमतमा रहा था ….हम चाय ले कर फिर से बैठक में आ गये ….”आपका नाम कà¥à¤¯à¤¾ है ….?”
“मेरा नाम जो हनà¥à¤Ÿà¤° है ….और आपका ….?”
“जी ….म….मैं सरोज ….” वो हिचकती हà¥à¤ˆ सी बोली …. “आप दिवà¥à¤¯à¤¾ को रोज पढ़ाने आयेंगे ना …. à¤à¤¸à¤¾ सà¥à¤§à¥€à¤° कह रहा था ….!” मैं सकपका गया। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पढ़ाने की बात मà¥à¤à¥‡ नहीं पता थी।
“मै आपको सरोज ही कहूà¤à¤—ा …. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आपको आणà¥à¤Ÿà¥€ कहना आपके साथ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¤à¥€ होगी !” सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही उसने अपना चेहरा हाथों में छà¥à¤ªà¤¾ लिया।
“पर वो दिवà¥à¤¯à¤¾ ….?”
“हां …. हां मैं आ जाऊंगा ….उसे à¤à¥€ पà¥à¤¾ दूंगा” मैंने मौके को हाथ से गंवाना उचित नहीं समà¤à¤¾à¥¤ मैंने चाय समापà¥à¤¤ की और खड़ा हो गया। वो à¤à¥€ खड़ी हो गई और मेरे समीप आ गई। मैंने इधर उधर देखा कि कोई नहीं है तो मैंने सरोज का हाथ पकड़ लिया। वो खà¥à¤¦ ही धीरे से मेरे सीने से लग गई। मैंने उसे लिपटाते हà¥à¤ अपनी बाहों में कस लिया। उसने अपना चेहरा ऊपर उठा लिया और अपनी आंखे बनà¥à¤¦ कर ली। मà¥à¤à¥‡ कà¥à¤› समठमें नहीं आया पर मेरे शरीर में तरावट आने लगी थी, वासना जागने लगी थी। सà¥à¤µà¤¤: ही मेरे होंठआप ही उसके होंठो की ओर बॠगये। कà¥à¤› ही देर में हम दोनों à¤à¤• दूसरे के होंठचूस रहे थे। मैंने अब उसके उरोजो को थाम लिया। वो कसक उठी।
“हाय …. मत करो …. सीऽऽऽ …. हाय रे” उसके मà¥à¤– से सिसकारी निकल पड़ी। मैंने धीरे धीरे उसके सà¥à¤¤à¤¨ दबाने और मसलने चालू कर दिये। उसकी बाहों का कसाव और बॠचला था। अब मैंने à¤à¤• हाथ से उसके चूतड़ दबाने शà¥à¤°à¥‚ कर दिये थे। अब उसका à¤à¥€ à¤à¤• हाथ मेरे लणà¥à¤¡ पर आ चà¥à¤•ा था और कस कर पकड़ लिया था।
“हाय …. छोड़ दो ना …. आऽऽऽऽह …. कà¥à¤¯à¤¾ कर रहे हो ….?” इनà¥à¤•ार में इकरार था ….मेरा लणà¥à¤¡ उसने कस के पकड़ रखा था। कह तो रही थी छोड़ने को और बेतहाशा लिपटी जा रही थी। बाहर फ़ाटक की आवाज आई तो वो मेरे से छिटक के दूर हो गई ….
“कल सवेरे नौ बजे आना …. मैं इनà¥à¤¤à¥›à¤¾à¤° करà¥à¤‚गी ….!” इतने में दिवà¥à¤¯à¤¾ अनà¥à¤¦à¤° आ गई। à¤à¤•बारगी तो वो ठिठक गई …. शायद उसने माहौल à¤à¤¾à¤‚प लिया था। मैंने अब दिवà¥à¤¯à¤¾ को निहारा। वो à¤à¤• जवान लड़की थी …. जीनà¥à¤¸ पहने थी …. अपनी मां की तरह चà¥à¤²à¤¬à¥à¤²à¥€ थी …. तो इसे पà¥à¤¾à¤¨à¤¾ है …. लगा कि मेरी तो किसà¥à¤®à¤¤ अपने आप ही मेहरबान हो गई है …. आया था कि इन पर इमà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ जमा कर पटाऊंगा। पर यहां तो सà¤à¥€ कà¥à¤› अपने आप हो रहा था। मैं मà¥à¤¸à¥à¤•रा कर बाहर आ गया।
अगले दिन सवेरे नौ बजे मै सà¥à¤§à¥€à¤° के यहाठपहà¥à¤‚च गया। सà¥à¤§à¥€à¤° कहीं जाने की तैयारी कर रहा था।
“थेंकà¥à¤¸ यार …. तà¥à¤®à¤¨à¥‡ दिवà¥à¤¯à¤¾ को पà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिये हां कर दी …. मैं जरा हेपà¥à¤ªà¥€ से मिलने यहीं पान की दà¥à¤•ान तक जा रहा हूठ….” कह कर वो चला गया।
दिवà¥à¤¯à¤¾ मेज़ पर बैठी पà¥à¤¾à¤ˆ कर रही थी। मà¥à¤à¥‡ देखते ही उसने अपने पास ही à¤à¤• कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ और लगा दी।
अनà¥à¤¦à¤° से सरोज ने मà¥à¤à¥‡ देखा और शरमाती हà¥à¤ˆ मà¥à¤¸à¥à¤•रा दी …. दिवà¥à¤¯à¤¾ ने फिर से à¤à¤• बार इस बात को देख लिया। मैं कà¥à¤› देर तक तो पà¥à¤¾à¤¤à¤¾ रहा …. फिर मà¥à¤à¥‡ महसूस हà¥à¤† कि उसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ पà¥à¤¾à¤ˆ पर नहीं मेरी ओर था।
“मà¥à¤à¥‡ मत देखो …. …. इधर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ लगाओ ….” पर दिवà¥à¤¯à¤¾ ने सीधे वार करते हà¥à¤ मेरी जांघ पर हाथ रख दिया ।
“आपने कल ममà¥à¤®à¥€ को किस किया था ना ….” वो फ़à¥à¤¸à¥žà¥à¤¸à¤¾à¤ˆ, मैं बà¥à¤°à¥€ तरह से चौंक गया।
“कà¥à¤¯à¤¾ ??? ….कà¥à¤¯à¤¾ कहा ….” मैं हड़बड़ा गया.
“ममà¥à¤®à¥€ ने मà¥à¤à¥‡ बताया था …. मैं और ममà¥à¤®à¥€ सब बातें à¤à¤• दूसरे को बताती है …. मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ किस करो ना ….” मà¥à¤à¥‡ à¤à¤• बार तो समठमें नहीं आया कि à¤à¤¸à¥‡ मौके पर कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिये……उसके हाथ मेरे लणà¥à¤¡ की तरफ़ बढ रहे थे। मेरे शरीर में सनसनी फ़ैल रही थी। अचानक वो मेरे से लिपट पड़ी। दरवाजे से सरोज सब देख रही थी। मेरी नजर जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ही दरवाजे पर पड़ी सरोज ने अपनी à¤à¤• आंख दबा कर मà¥à¤¸à¥à¤•रा दी। मैंने इसमें उसकी सà¥à¤µà¥€à¤•ृति को समà¤à¤¾ और दिवà¥à¤¯à¤¾ का कà¥à¤‚वारा शरीर मेरी आगोश में आ गया।
उसकी उà¤à¤°à¤¤à¥€ जवानी पर मेरे हाथ फ़िसलने लगे। वो बेतहाशा अब मà¥à¤à¥‡ चूमने लगी। मेरा हाथ उसकी सà¥à¤•रà¥à¤Ÿ में घà¥à¤¸ पड़ा। उसकी चूत गीली हो चà¥à¤•ी थी। मैंने उसकी पेनà¥à¤Ÿà¥€ में हाथ डाल कर उसकी चूत दबा दी। जवाब में उसने à¤à¥€ मेरा लणà¥à¤¡ दबा दिया। सरोज ने अनà¥à¤¦à¤° से इशारा किया तो मैंने उसे छोड़ दिया। दिवà¥à¤¯à¤¾ लगà¤à¤— हांफ़ते हà¥à¤ अलग हो गई। उसकी आंखो में वासना के लाल डोरे लगे खिंच चà¥à¤•े थे। सरोज चाय बना कर ले आई।
“दिवà¥à¤¯à¤¾ ….कॉलेज में देर हो जायेगी …. तैयार हो जाओ ….” सरोज ने दिवà¥à¤¯à¤¾ को आंख मारते हà¥à¤ कहा। दिवà¥à¤¯à¤¾ मà¥à¤¸à¥à¤•राते हà¥à¤ उठी और लहरा कर चल दी। वो समठचà¥à¤•ी थी कि ममà¥à¤®à¥€ अब गरम हो चà¥à¤•ी है अब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ चाहिये। मैंने चाय समापà¥à¤¤ की और पà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¾ मेज़ पर रख दिया।
“सरोज …. जरा सा और पास आ जाओ ….” मैंने आज मौके का à¤à¤°à¤ªà¥‚र फ़ायदा उठाने की सोचते हà¥à¤ अपनी मनमोहक मà¥à¤¸à¥à¤•राहट बिखेर दी। उसकी आंखें à¤à¥à¤• गई। पर उठकर चà¥à¤ª से मेरी गोदी में बैठगई। जैसे ही वो मेरी जांघो पर बैठी उसके चूतड़ो का सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ हà¥à¤†à¥¤ वो अनà¥à¤¦à¤° पेनà¥à¤Ÿà¥€ नहीं पहने थी। उसके लचकदार चूतड़ का सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ पा कर मेरा लणà¥à¤¡ फ़à¥à¤«à¤¼à¤•ार उठा। हम दोनों अब à¤à¤• दूसरे को चूम रहे थे। मेरा हाथ जैसे ही उसके बोबे पर पड़ा …. उसके बोबे बाहर छलक पड़े। उसके बà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ नहीं पहनी थी ….यानि चà¥à¤¦à¤¨à¥‡ के लिये वो बिलà¥à¤•à¥à¤² तैयार थी। मेरा लणà¥à¤¡ उसके चूतड़ों पर लगने लगा था। कà¥à¤› ही देर में वो बैचेन हो उठी ….
“सà¥à¤¨à¥‹ जी …. अब देरी किस बात की है ….”कह कर वो बà¥à¤°à¥€ तरह लाल हो गई। मैं उसकी इस अदा पर मर गया …. मैंने उसे गोदी में से उतार कर खड़ा कर दिया और अपनी पेनà¥à¤Ÿ उतार दी …. वो शरम से सिमटी जा रही थी …. पर उसने बिसà¥à¤¤à¤° पर आने की देर नहीं की। उसके मन की हलचल मैं समठरहा था ….लगता था बरसों की पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ है ….।
मेरा लणà¥à¤¡ देखते ही वो मचल उठी। उसने मेरा लणà¥à¤¡ अपने हाथो में ले लिया और पकड़ कर दबाने लगी …. लणà¥à¤¡ की चमड़ी ऊपर नीचे करने लगी, इसके कारण मेरा सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¾ रगड़ खाने लगा ….मà¥à¤à¥‡ तेज मजा आया ….मीठी मीठी सी गà¥à¤¦à¤—à¥à¤¦à¥€ उठने लगी । उसने मेरी तरफ़ देखा …. मैं उसे पà¥à¤¯à¤¾à¤° से देख रहा था ….
“हाय रे ….मेरी तरफ़ मत देखो ना …. उधर देखो ….” और शरमाते हà¥à¤ मेरे सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¥‡ को अपने मà¥à¤à¤¹ में à¤à¤° लिया। दोनों हाथो से मेरे चूतड़ à¤à¥€à¤‚च लिये और पूरा लणà¥à¤¡ मà¥à¤à¤¹ में à¤à¤° कर अनà¥à¤¦à¤° बाहर करने लगी। सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ जोर से चूस रही थी ….à¤à¤• तरह से अपने मà¥à¤à¤¹ को चोद रही थी। मेरे मà¥à¤– से आह निकल रही थी …. कà¥à¤› देर तक यही सिलसिला चलता रहा।
उसने फिर कहा-”सà¥à¤¨à¥‹ जी ….अब देर किस बात की है …. ” फिर से à¤à¤• बार शरमा गई और फिर वो कहने लगी, “तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡ देखते ही मà¥à¤à¥‡ लगा कि तà¥à¤® मेरे लिये ही बने हो ….तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ में गजब की कशिश है !”
“सरोज तà¥à¤® बहà¥à¤¤ सेकà¥à¤¸à¥€ हो …. देखो मà¥à¤à¥‡ कैसे बस में कर लिया ….”
“मैं बहà¥à¤¤ महीनों से पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ हूठ….और मेरी बेटी …. उसकी नजरें à¤à¥€ à¤à¤Ÿà¤•ने लगी थी …. मैंने उसे रंगे हाथो पकड़ लिया था …. तब से मैंने उसे अपना राजदार बना लिया और अब हम सही लड़का देख कर दोनों ही अपनी पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ शानà¥à¤¤ करती हैं ….”
मà¥à¤à¥‡ उसकी बातों से कोई सरोकार नहीं था …. मà¥à¤à¥‡ तो à¤à¤• बदले दो दो चूत बिना मांगे ही मिल रही थी।
वो कहती जा रही थी ….”सà¥à¤§à¥€à¤° से मैं परेशान रहती हूठ! वो जाने कà¥à¤¯à¤¾ करता है? जाने कहां से नशे की चीज़े लाता है और बेचता है …. हमारे मना करने पर वो हम दोनों को पीटता है ….।”
सरोज की सारी बातें मैं धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रख रहा था पर उसे यही दरà¥à¤¶à¤¾ रहा था कि मैं सेकà¥à¤¸ में ही रà¥à¤šà¤¿ ले रहा हूà¤à¥¤
“बस सरोज अब चà¥à¤ª हो जाओ, मैं अब से तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ साथ हूठ…. मजे लो अब ….मेरा देखो न कितना बà¥à¤°à¤¾ हाल है ….” मैंने उसकी चूत पर अपना तनà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ हà¥à¤† लणà¥à¤¡ का दबाव देते हà¥à¤ कहा। उसका शरीर वासना से कसक रहा था। उसकी तड़प मà¥à¤à¥‡ महसूस हो रही थी। मैंने उसके बोबे दाबते हà¥à¤ नीचे जोर लगाया …. लणà¥à¤¡ चूत में उतरता चला गया। उसकी कसी हà¥à¤ˆ चूत मेरे लणà¥à¤¡ के चारों ओर मीठा सा घरà¥à¤·à¤£ दे रही थी। उसने अपनी चूत को और ऊपर की ओर उà¤à¤¾à¤° ली। मेरा लणà¥à¤¡ अà¤à¥€ à¤à¥€ थोड़ा बाहर था। उसके मà¥à¤– से सिसकारी निकलती जा रही थी। मà¥à¤à¥‡ लगा कि मेरा लणà¥à¤¡ उसकी चूत की पूरी गहराई में घà¥à¤¸ चà¥à¤•ा था। पर लणà¥à¤¡ अà¤à¥€ à¤à¥€ बाहर था।
“अब धीरे से बाहर निकाल कर अनà¥à¤¦à¤° और दबाओ ….” उसने सिसकते हà¥à¤ कहा।
मैंने अपना लणà¥à¤¡ थोड़ा सा बाहर निकाला और अनà¥à¤¦à¤° और दबा दिया। उसे हलà¥à¤•ा स दरà¥à¤¦ हà¥à¤† …. फिर à¤à¥€ बोली,”à¤à¤¸à¤¾ और करो ….”
“पर आपको दरà¥à¤¦ हो रहा है ना ….?”

इसी दरà¥à¤¦ में तो मजा है ….पूरा घà¥à¤¸à¥‡à¤—ा तो ही शानà¥à¤¤à¤¿ मिलेगी ना ….!” उसने दरà¥à¤¦ à¤à¥‡à¤²à¤¤à¥‡ हà¥à¤ कहा।
मैंने फिर से लणà¥à¤¡ दबाया …. पर इस बार à¤à¤Ÿà¤•े से पूरा डाल दिया। उसके मà¥à¤– से हलà¥à¤•ी सी चीख निकल गई।
“हाय रे ….! मर गई ….! ये हà¥à¤ˆ ना मरà¥à¤¦à¥‹ वाली बात …. ! बस अब थोड़ा रà¥à¤•ो ….!” वो अपने सà¥à¤Ÿà¤¾à¤ˆà¤² में बताते हà¥à¤ चà¥à¤¦à¤µà¤¾à¤¨à¥‡ लगी।
उसने कहा,”अब मेरी चूतड़ के नीचे तकिया रख दो …. फिर बस à¤à¤• धकà¥à¤•ा और ….”
“देखो बहà¥à¤¤ दरà¥à¤¦ होगा ….”
“आज होने दो ….बिना दरà¥à¤¦ के मजा नहीं आता है ….”
मैंने उसकी गाणà¥à¤¡ के नीचे तकिया घà¥à¤¸à¤¾ दिया , उसकी चूत ऊपर की ओर उठगई और मैंने इस बार पूरा जोर लगा कर लणà¥à¤¡ को चूत में गड़ा दिया। दरà¥à¤¦ से उसने दांत à¤à¥€à¤‚च लिये और मैंने अब उसके बोबे थामें और मसलते हà¥à¤ धीरे धीरे पर गहराई तक चोदने लगा। वो पसीने में नहा चà¥à¤•ी थी। उसका सारा बदन उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ से कांप रहा था। मैं à¤à¥€ अपना आपा खोता जा रहा था। उसकी टाईट चूत मेरे लणà¥à¤¡ को लपेट कर सहला रही थी।
उसने कहा,”राजा …. तेजी से चोदो ना ….आज मà¥à¤à¥‡ मसà¥à¤¤ कर दो ….”
मेरे धकà¥à¤•े तेज होते गये। उसकी सिसकारियाठबढ़ती गई। वो अपने पूरे जोश से अपने चूतड़ हिला हिला कर चà¥à¤¦à¤µà¤¾ रही थी। अचानक मà¥à¤à¥‡ लगा कि उसका कसाव मेरे पर बढ़ गया है …. और वो à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगी।
मैंने उस ओर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं दिया ….और चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ जारी रखी। à¤à¤¡à¤¼ कर à¤à¥€ वो उसी जोश में चà¥à¤¦à¤µà¤¾à¤¤à¥€ रही …. मैंने उसे चूम चूम कर उसका चेहरा अपने थूक से गीला कर दिया था। वो à¤à¥€ बराबरी से मà¥à¤à¥‡ चाट रही थी। अचानक उसने मà¥à¤à¥‡ इशारा किया और वो मेरे ऊपर आ गई। आसन बदल लिया। वो मेरे पर à¤à¥à¤• गई और लणà¥à¤¡ चूत में घà¥à¤¸à¤¾ कर जबरदसà¥à¤¤ धकà¥à¤•े मारने लगी। उसके बोबे जोर जोर से उछल रहे थे। मैंने दोनों बोबे को कस के मसलना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया। उसके धकà¥à¤•े इतने जबरà¥à¤¦à¤¸à¥à¤¤ थे कि उसे à¤à¥€ शायद तकलीफ़ हो रही होगी। लगता था जनà¥à¤®-जनà¥à¤® की पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ बà¥à¤à¤¾à¤¨à¤¾ चाहती थी।
कà¥à¤› ही देर में मैं à¤à¥€ चरमसीमा पर पहà¥à¤‚च गया और और चूत के अनà¥à¤¦à¤° ही लणà¥à¤¡ ने अपनी पिचकारी छोड़ दी। वो कब à¤à¤¡à¤¼ गई मà¥à¤à¥‡ पता नहीं चला। पर हाफ़ते हà¥à¤ मेरे पर लेट गई। उसका जिसà¥à¤® पसीने में तर था। हम दोनों à¤à¤• दूसरे से लिपटे हà¥à¤ कà¥à¤› देर पड़े रहे। फिर मैं धीरे से उठा।
“सरोज तà¥à¤® तो चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ में मसà¥à¤¤ हो …. मेरा सारा माल निकाल दिया ….” सरोज फिर से शरमा गई।
“मैं तो दो बार à¤à¤¡à¤¼ गई …. हाय राम …. मेरा पेटीकोट तो दे दो ….” उसने à¤à¤Ÿ से कपड़े पहन लिये।
मैंने à¤à¥€ कपड़े पहने और पूछा,”बाथरूम किधर है ….” उसने उंगली से इशारा कर दिया। मैं बाथरूम में गया और अपना मà¥à¤– धो लिया ….तà¤à¥€ मेरी नजर हैंगर पर टंगे जैकेट पर पड़ी। वो सà¥à¤§à¥€à¤° का था। मैंने तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ उसकी तलाशी ली। उसमें कोई शायद नशे की कोई चीज़ थी। उसमें à¤à¤• पिसà¥à¤¤à¥Œà¤² à¤à¥€ था। सारी चीज़े यथावत रख कर मैं बाहर आ गया।
“अचà¥à¤›à¤¾ अब मैं चलता हूठ….” उसने मà¥à¤¸à¥à¤•रा कर हामी à¤à¤° दी ….
मैं जैसे ही बाहर निकला, मेरा मन à¤à¤•दम धक से रह गया, दिवà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤• कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ पर बैठी कोई मेगà¥à¤œà¤¼à¥€à¤¨ देख रही थी।
“तॠ….तॠ…. तà¥à¤® ….कॉलेज नहीं गई ….?”
“और यहां की चौकीदारी कौन करता ….??? …. कल आओगे ना ….” उसने à¤à¤• सेकà¥à¤¸à¥€ नजर डालते हà¥à¤ कहा।
“कल ….तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ बारी है …. तैयार रहना ….!” मै धीरे से à¤à¥à¤• कर बोला…
उसकी मà¥à¤¸à¥à¤•ान और à¤à¥à¤•ी à¤à¥à¤•ी नजरें उसकी सà¥à¤µà¥€à¤•ृति दरà¥à¤¶à¤¾ रही थी ….।
समय देखा साढ़े दस बज रहे थे …. मैंने अपनी मोटर साईकल उठाई और सीधे पà¥à¤²à¤¿à¤¸ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ पहà¥à¤‚चा। अंकल मेरा ही इनà¥à¤¤à¤œà¤¼à¤¾à¤° कर रहे थे।
मैंने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• à¤à¤• करके सब बताना शà¥à¤°à¥ कर दिया,”अंकल, सà¥à¤§à¥€à¤° के अलावा, हैपà¥à¤ªà¥€, सà¥à¤°à¤œà¥€à¤¤ और मोनà¥à¤Ÿà¥€ है, चारों à¤à¤• ही गांव के है …. हेपà¥à¤ªà¥€ टूसीटर चलाता है और नशे की चीजें बेचता है। मोनà¥à¤Ÿà¥€ किसी à¤à¤œà¥‡à¤¨à¥à¤Ÿ से ये नशीली चीज़े लाता है। सà¥à¤°à¤œà¥€à¤¤ अवैध दारू के पाऊच लाता है और पानवाले के पास रखता है। सà¥à¤§à¥€à¤° के पास à¤à¥€ घर पर ये नशे की चीज़े हैं और à¤à¤• पिसà¥à¤¤à¥Œà¤² à¤à¥€ है। और …. ….”सारी रिपोरà¥à¤Ÿ बताता रहा और रिपोरà¥à¤Ÿ देने के बाद मैंने उनसे à¤à¤• दिन का समय और मांगा।
अंकल ने सारी बाते समठली थी। अंकल शहर के à¤à¤¸ पी थे ….उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शक तो पहले ही था पर नेहा के कहने पर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कारà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¹à¥€ का वचन दिया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जरूरी बातें अपनी डायरी में नोट कर ली।
मैं यहाठसे सीधा कामिनी से मिलने नेहा के घर चला आया था …. आज वो बहà¥à¤¤ बेहतर लग रही थी …. चल फिर रही थी …. उसमें ताकत आ गई थी।
मैंने जब अपनी बात उसे बताई तो वह सनà¥à¤¤à¥à¤·à¥à¤Ÿ नजर आई, पर खà¥à¤¦ को रोने से नहीं रोक पाई। अंतत: वो फ़फ़क के फिर रो से पड़ी।
मैं पà¥à¤²à¤¿à¤¸ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ से बाहर आया और अपनी मोटर साईकल उठा कर सीधे सà¥à¤§à¥€à¤° के घर आ गया। अà¤à¥€ सवेरे के साढ़े आठही बजे थे….हमेशा की तरह सà¥à¤§à¥€à¤° घर पर नहीं था। उसे शायद यह मालूम नहीं था कि आज उसका इस घर में अनà¥à¤¤à¤¿à¤® दिन है। घर में सरोज नहीं थी….दिवà¥à¤¯à¤¾ ही मिली।
“आज तो जलà¥à¤¦à¥€ आ गये…. कà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤† रात को नींद नहीं आई कà¥à¤¯à¤¾â€¦.?†उसकी चà¥à¤²à¤¬à¥à¤²à¥€ हरकत मेरे मन को बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¥€ लगी।
“दिवà¥à¤¯à¤¾ ….बस रात को तो मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ ही सपने देखता रहा …. तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ जैसी कमसिन और जवान लड़की जिसे मिल जाये….उसकी तो किसà¥à¤®à¤¤ ही खà¥à¤² जाये….†मेरी बात सà¥à¤¨ कर वो और इठलाने लगी।
“अब अनà¥à¤¦à¤° à¤à¥€ चलो…. †मà¥à¤à¥‡ वो धकà¥à¤•ा देते हà¥à¤ बोली….â€à¤¬à¥‹à¤²à¥‹ अब कà¥à¤¯à¤¾ इरादा है….!â€
“बस à¤à¤• मीठा सा चà¥à¤®à¥à¤®à¤¾â€¦.†मैंने शरारत से कहा।
“है हिमà¥à¤®à¤¤ तो ले लो….!†उसने हंस कर कहा।
“à¤à¤¸à¥‡ नहीं …. पहले अपनी आà¤à¤–ें बंद करो….फिर देखो मेरा कमाल….â€
उसने अपनी आà¤à¤–ें बनà¥à¤¦ कर ली और अपना गोरा और चिकना चेहरा आगे कर दिया…. मैंने उसके होंठपर अपने होंठरख दिये…. उसके कांपते होंठो का सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ मà¥à¤à¥‡ रोमांचित कर गया। à¤à¤•दम नरम होंठ….गà¥à¤²à¤¾à¤¬ की पंखà¥à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की तरह ….। हम दोनों à¤à¤• दूसरे के होंठो को चूसने लगे….दोनों ही मदहोश होने लगे। कà¥à¤› देर बाद अलग हà¥à¤ तो दोनों के चेहरे की रंगत बदली हà¥à¤ˆ थी। मेरा लणà¥à¤¡ खड़ा हो चà¥à¤•ा था। उसकी आंखों में à¤à¥€ गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ डोरे खिंच चà¥à¤•े थे।
दिवà¥à¤¯à¤¾ ने थोड़ा सा शरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ और फिर से आà¤à¤–ें बनà¥à¤¦ करके कहा,â€à¤œà¥‹ ….मेरी छातियों को पकड़ लो….हाय…. मसल डालो….†उसने अपनी छाती आगे को उà¤à¤¾à¤° दी, उसके तने हà¥à¤ उरोज बाहर को उà¤à¤° आये। मैंने उसकी चूंचियो पर अपना हाथ रख दिया। और हौले हौले से दबाने लगा। उसके मà¥à¤– से सिसकारी निकलने लगी। वो à¤à¥€ मेरे हाथों पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दबाने के लिये और दबाव डालने लगी। मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर à¤à¤• हाथ से उसके उà¤à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ को मसलना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया और अब मेरी कमर वाला हाथ चूतड़ों के ऊपर आ कर थम गया। मेरे हाथ उसके बोबे और चूतड़ दबा रहे थे और दिवà¥à¤¯à¤¾ अपने जिसà¥à¤® को मेरे जिसà¥à¤® से बल खा कर रगड़ रही थी। उसके मà¥à¤à¤¹ से आह….हाय….मां री…. जैसी सिसकारियाठनिकल रही थी। मैंने उसे दीवार से सटा कर उसकी चूत को पकड़ कर दबा दी। वो चिहà¥à¤‚क उठी….
“हाय छोड़ दे जोऽऽऽ…. मैं मर गई….†वो मदहोश सी à¤à¥‚म गई। मैंने उसकी चूत नहीं छोड़ी ….सà¥à¤•रà¥à¤Ÿ के बाहर से ही उसकी चूत मसलता रहा…. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी….मेरे हाथ को गीलापन लगने लगा था।
वो मसà¥à¤¤à¥€ में à¤à¥à¤•ने लगी….पर उसने मेरा हाथ नहीं छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¯à¤¾â€¦.â€à¤•à¥à¤¯à¤¾ कर रहे हो जोऽऽऽ…. मà¥à¤à¥‡ मार डालोगे कà¥à¤¯à¤¾ ???…. अब बस अब….नहीं रहा जा रहा है….†उसकी उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ बहà¥à¤¤ बढ़ गई थी।…….. बेहाल हà¥à¤ˆ जा रही थी….।
मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और पà¥à¤¯à¤¾à¤° से उसे बिसà¥à¤¤à¤° पर लेटा दिया। उसकी आà¤à¤–ेंं बंद थी। मैंने उसका सà¥à¤•रà¥à¤Ÿ ऊपर कर दिया….उसकी पानी छोड़ती हà¥à¤ˆ गीली चूत सामने थी। गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ रंग…. हलà¥à¤•ी à¤à¥‚री à¤à¥‚री à¤à¤¾à¤‚टे…. चूत के दोनों लब फ़ड़फ़ड़ा रहे थे…. मैंने अपनी पैनà¥à¤Ÿ उतार दी…. और अपना मोटा और तनà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ हà¥à¤† लणà¥à¤¡ उसकी पनीली चूत पर रख दिया। चिकनापन इतना था कि रखते ही सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ अनà¥à¤¦à¤° घà¥à¤¸ पड़ा और छेद में उतर गया।
“घà¥à¤¸à¤¾ दे रे…. हाय…. जरा जोर लगा दे ….जो….†उसकी बैचेनी बढ़ रही थी…. पूरा लणà¥à¤¡ लेने को उतावली हो रही थी…. मैं उस पर à¤à¥à¤• पड़ा….और जोर लगा कर लणà¥à¤¡ अनà¥à¤¦à¤° सरकाने लगा। वो à¤à¥€ अपनी चूत का पूरा जोर लगा रही थी। जब दोनों और बेकरारी बराबर हो तब à¤à¤²à¤¾ तेजी को कौन रोक सकता था। वो à¤à¤°à¤ªà¥‚र जवान….खिलती हà¥à¤ˆ कली…. पूरा जोश…. नतीजा ये कि धकà¥à¤•ा पर धकà¥à¤•ा…. गजब की तेजी…. चूत का उछाल…. लणà¥à¤¡ को सटासट चला रहा था। मैंने उसके बोबे à¤à¥€à¤‚च लिये….
“और जोर से à¤à¥€à¤‚चो …. मेरे राजा…. चोद दो आज मà¥à¤à¥‡â€¦.!†उसकी वासना बढ़ती जा रही थी…. मेरा लणà¥à¤¡ पूरी गहराई तक पहà¥à¤‚च रहा था…. उसकी चूत जवान थी ….कोई à¤à¥€ लणà¥à¤¡ पूरा ले सकती थी। मेरा लणà¥à¤¡ à¤à¥€ मानो कम लमà¥à¤¬à¤¾ लग रहा था।
अचानक मेरे चूतड़ पीछे से किसी ने दबा दिये…. मैंने देखा तो सरोज थी….चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ के जोश में वो कब आई पता ही नहीं चला। उसने मà¥à¤à¥‡ इशारा किया। मैंने समठगया…. मैंने तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ ही दिवà¥à¤¯à¤¾ के बोबे जोर जोर से मसलने और खींचने लगा। उसने à¤à¥€ मेरे चूतड़ दबाना चालू रखा।
“जो मत करो….मैं à¤à¤¡ जाऊंगी…. हाऽऽऽय ना करो……..†पर मैंने बेरहमी से दिवà¥à¤¯à¤¾ के बोबे मसलना जारी रखा…. और धकà¥à¤•े चूत में गड़ा कर मारने लगा। उसे जबरà¥à¤¦à¤¸à¥à¤¤ चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ चाहिये थी।
“मैं मर गई….राम रे…. चà¥à¤¦ गई…. मेरी फ़ाड़ डाल जो…. हाय मैं गई……..†उसके जिसà¥à¤® में उबाल आ गया था। उसे नहीं पता था कि उसकी मां उसके पास खड़ी है। मेरी उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ à¤à¥€ बहà¥à¤¤ बढ़ गई थी…. पर अब दिवà¥à¤¯à¤¾ का शरीर à¤à¤‚ठने लग गया था। वो मà¥à¤à¥‡ अपनी ओर जोर से खींचने लगी थी। अचानक उसने पूरी ताकत से मà¥à¤à¥‡ चिपका लिया और उसकी चूत लहरा उठी। वो à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगी थी। सरोज ने दिवà¥à¤¯à¤¾ का जिसà¥à¤® जोर जोर से सहलाना शà¥à¤°à¥ कर दिया था। उसकी चूत का कसना और ढीला होना….उसका पानी छोड़ना मà¥à¤à¥‡ बहà¥à¤¤ सà¥à¤¹à¤¾à¤¨à¤¾ लग रहा था। सरोज बराबर उसका जिसà¥à¤® सहलाये जा रही थी।
“à¤à¤¡à¤¼ जा बेटी…. निकाल दे पूरा पानी….†सरोज उसे पà¥à¤¯à¤¾à¤° से कह रही थी।
“मांऽऽऽ …. हाय मेरी मां ऽऽऽ …. तेरी बेटी तो चà¥à¤¦ गई…. जो ने तो मेरा दम निकाल दिया….†दिवà¥à¤¯à¤¾ हांफ़ते हà¥à¤ बोली। मैंने अपना लणà¥à¤¡ दिवà¥à¤¯à¤¾ की चूत से बाहर निकाल दिया।
“लेकिन मेरा लणà¥à¤¡ तो देखो ना….अà¤à¥€ तक ये फ़à¥à¤«à¤¼à¤•ार रहा है…. सरोज तà¥à¤® ही शानà¥à¤¤ कर दो….†मैंने अपनी बात à¤à¥€ कही…. दिवà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ अब बिसà¥à¤¤à¤° से उठचà¥à¤•ी थी।
“जो….ममà¥à¤®à¥€ की गाणà¥à¤¡ मार दो…. मां की गाणà¥à¤¡ बहà¥à¤¤ नरम है….!†अचानक दिवà¥à¤¯à¤¾ ने मà¥à¤à¥‡ सà¥à¤à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤
सरोज ने शरम से अपना मà¥à¤– छिपा लिया। मैंने सरोज को तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ घोड़ी बना दिया। और साड़ी खींच दी। सरोज की गोरे गोरे चूतड़ों की दोनों फ़ांके सामने आ गई। सरोज ने अपनी दोनों टांगें फ़ैला कर अपने गाणà¥à¤¡ का छेद खोल दिया। फिर मà¥à¤à¤¸à¥‡ शरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ बोली,â€à¤¹à¤¾à¤¯ ….मत करो जो….मैं मर जाऊंगी….†फिर दिवà¥à¤¯à¤¾ की तरफ़ देखा -†दिवà¥à¤¯à¤¾ तू जा ना यहाठसे….â€
“मां, मेरे सामने ही गाणà¥à¤¡ चà¥à¤¦à¤µà¤¾ लो ना….! मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ तो à¤à¤• इसका à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤ªà¥€à¤°à¥€à¤à¤¨à¥à¤¸ चाहिये ना….!â€
“चल हट…. बेशरम….तेरे सामने चà¥à¤¦à¥‚ंगी तो शरम नहीं आयेगी?â€
“मैं à¤à¥€ तो आपके सामने चà¥à¤¦à¥€ थी ना….जो लग जाओ ना अब….†दिवà¥à¤¯à¤¾ ने पास पड़ी तेल की शीशी से तेल मां की गाणà¥à¤¡ में लगा दिया….â€à¤…ब चोद दो मां की गाणà¥à¤¡ को….!â€
मà¥à¤à¥‡ लगा कि बस सà¥à¤µà¤°à¥à¤— है तो यहीं है…….. मां बेटी मà¥à¤à¤¸à¥‡ इतने उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ से चà¥à¤¦à¤µà¤¾ रही थी….मैं तो सातवें आसमान पर पहà¥à¤‚च गया। मैंने अपना लणà¥à¤¡ सरोज की गाणà¥à¤¡ के छेद पर लगा दिया और जोर लगाया, छेद में तेल à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† था मेरा सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ फ़क की आवाज करता हà¥à¤† छेद में फ़ंस गया।
“उईऽऽ….मां…. हाय रे….घà¥à¤¸ गया…. !†सरोज सिसक उठी। दिवà¥à¤¯à¤¾ अपनी मां के बोबे पकड़ कर धीरे धीरे मलने लगी और पà¥à¤¯à¤¾à¤° करने लगी।
“जो…. मेरी पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ मां को तबियत से चोदो…. मां को आननà¥à¤¦ से à¤à¤° दो…. देखो ना मां को कितना अचà¥à¤›à¤¾ लग रहा है….†दिवà¥à¤¯à¤¾ मां की ओर पà¥à¤¯à¤¾à¤° से देख रही थी। सरोज ने अपनी आà¤à¤–ें बनà¥à¤¦ कर ली थी। मैं अब अपना लणà¥à¤¡ जोर लगा कर अनà¥à¤¦à¤° सरकाने लगा। मेरे लणà¥à¤¡ को छोटे से छेद में घà¥à¤¸à¤¨à¥‡ के कारण तेज मीठा सा सा मजा आने लगा। पर सरोज ने अपने दांत à¤à¥€à¤‚च लिये। उसे हलà¥à¤•ा सा दरà¥à¤¦ हो रहा था। दिवà¥à¤¯à¤¾ मां को मजा देने के लिये उसके बोबे मसल रही थी। मेरा लणà¥à¤¡ गाणà¥à¤¡ में पूरा घà¥à¤¸ चà¥à¤•ा था। सरोज ने मà¥à¤à¥‡ मà¥à¤¡à¤¼ कर देखा और आंख मार दी….
“लणà¥à¤¡ है या लोहा…. मेरी तो फ़ाड़ के रख दी…. अब मारो ना जोर से गाणà¥à¤¡ को….â€
मैंने हरी à¤à¤£à¥à¤¡à¥€ पाते ही सà¥à¤ªà¥€à¤¡ बढ़ा दी। वो सिसक उठी। मजे में उसकी फिर आà¤à¤–ें बनà¥à¤¦ होने लगी।
“चोद दे मेरी मां को…. पà¥à¤¯à¤¾à¤° से à¤à¤° दो मां को…. मेरी पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ मां….†अब दिवà¥à¤¯à¤¾ सरोज को चूमने लगी थी। बोबे पर तो दिवà¥à¤¯à¤¾ ने कबà¥à¤œà¤¾ जमा रखा था। मैंने कमर में हाथ डाल कर उसकी चूत में अपनी अंगà¥à¤²à¥€ डाल दी। और डबल चà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ करने लगा। उसका दाना मसलने लगा। उसे तेज मजा आने लगा।
“हाय रे छोड़ दे अब रे…. लगा ….जोर से लगा…. मेरी मांऽऽऽ…. मार दी रे मेरी….†सरोज ना जाने कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ कहती रही। उसकी गाणà¥à¤¡ अब मकà¥à¤–न की तरह चिकनी हो गई थी। लणà¥à¤¡ सटासट चल रहा था। अति उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ से उसका दाना अचानक ही फ़ड़फ़ड़ा उठा और सरोज à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगी। ये देख कर कर दिवà¥à¤¯à¤¾ ने à¤à¥€ मां को कस लिया। मैंने à¤à¥€ à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ के चकà¥à¤•र में सà¥à¤ªà¥€à¤¡ बढ़ा दी। मेरा सà¥à¤ªà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾ फ़ूल कर कà¥à¤ªà¥à¤ªà¤¾ हो रहा था। सहनशीलता सीमाà¤à¤‚ पार करती जा रही थी और आखिर अनà¥à¤¤à¤¿à¤® पड़ाव आ ही गया। मैंने तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ अपना लणà¥à¤¡ बाहर निकाल लिया। दिवà¥à¤¯à¤¾ ने देखते ही देखते मेरे लणà¥à¤¡ को मà¥à¤ à¥à¤ ी में à¤à¤° लिया और कस कर दबा कर मà¥à¤ मार दिया। मेरे लणà¥à¤¡ ने पिचकारी लमà¥à¤¬à¥€ और दूर तक उछाल दी।
“हाय ममà¥à¤®à¥€â€¦.देखो तो…. माल तो फ़वà¥à¤µà¤¾à¤°à¥‡ की तरह निकल रहा है….â€
सरोज ने बिना समय गवांये à¤à¤Ÿ से मेरा लणà¥à¤¡ मà¥à¤– में à¤à¤° लिया…. अब वीरà¥à¤¯ सरोज के मà¥à¤– में à¤à¤° रहा था…. और वो उसे à¤à¤• ही घूंट में पी गई। अब वह बचे खà¥à¤šà¥‡ वीरà¥à¤¯ को à¤à¥€ निचोड़ रही थी…. दिवà¥à¤¯à¤¾ अपनी मां की इस हरकत को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देख रही थी….
“ममà¥à¤®à¥€â€¦.ये कà¥à¤¯à¤¾ गनà¥à¤¦à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ कर रही हो…. इसे à¤à¥€ कोई पीता है कà¥à¤¯à¤¾ ?â€
मैंने दिवà¥à¤¯à¤¾ को समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ कि ये तो पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• होता है और आननà¥à¤¦à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है…. दिवà¥à¤¯à¤¾ ने कपड़े से मां की गाणà¥à¤¡ का तेल पोंछ दिया फिर मेरा लणà¥à¤¡ à¤à¥€ साफ़ कर दिया। सरोज ने दिवà¥à¤¯à¤¾ को गले लगा लिया। और चूमने लगी….
“देखा जो….माठको तà¥à¤®à¤¨à¥‡ मसà¥à¤¤ कर दिया…. मà¥à¤à¥‡ बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ लगा….मेरी पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ मांऽऽ … †कह कर सरोज से अलग हो गई।
मैंने सरोज से बात पलटते हà¥à¤ कहा – “आज सà¥à¤§à¥€à¤° नहीं दिख रहा है….?â€
“वो चारों आज शाम को गांव जा रहे हैं न…. देर से आयेगा….†सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही मैं चौकनà¥à¤¨à¤¾ हो गया।
“अब तो वो तà¥à¤® दोनों को पीटता तो नहीं है ना….â€
†वो जंगली है…. कल देखो मà¥à¤à¥‡ कितना मारा…. दिवà¥à¤¯à¤¾ के तो बोबे तक नोच डाले…. साला मरता à¤à¥€ तो नहीं है….हमारी जिनà¥à¤¦à¤—ी नरà¥à¤• बना रखी है†कह कर सरोज ने मेरे सीने पर सर रख दिया। दिवà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ मां की पीठसे चिपक कर रोने लगी। तो सच में वो इतना निरà¥à¤¦à¤¯à¥€ और कà¥à¤°à¥‚र है।
मैंने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अलग करते हà¥à¤ कहा….â€à¤®à¥à¤à¥‡ अब चलना चाहिये….शाम को आऊंगा।†मैं मà¥à¤¡à¤¼ कर बाहर आ गया। वो दोनों मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤¯à¤¾à¤° से निहारते रही।
मैं तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ पà¥à¤²à¤¿à¤¸ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ गया और अंकल से मिला…. उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सब कà¥à¤› बताया…. कि वो सà¤à¥€ गांव जाने की तैयारी में है।
“शायद उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¨à¤• लग गई है…. चलो….†उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ जीप तैयार की और सà¤à¥€ सिपाहियो को आजà¥à¤žà¤¾ दी। मैंने अपनी बाईक उठाई और उनके आगे आगे चला। पान-वाले की दà¥à¤•ान पर पहला छापा मारा। मैंने à¤à¤¾à¤— कर टूसीटर पर बैठे मौनà¥à¤Ÿà¥€ और सà¥à¤°à¤œà¥€à¤¤ को जा दबोचा। मौनà¥à¤Ÿà¥€ ने मà¥à¤à¥‡ पीछे धकà¥à¤•ा दे दिया और मौके की नजाकत देख कर à¤à¤¾à¤—ने लगा। मैंने उछल कर à¤à¤• फ़à¥à¤²à¤¾à¤ˆà¤‚ग किक मार कर उसे गिरा दिया। इतने में दो पà¥à¤²à¤¿à¤¸ वालों ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ धर दबोचा। हैपà¥à¤ªà¥€ का पीछ करके अंकल ने उसे हथकड़ी पहना दी। पान की दà¥à¤•ान को सील कर दी। जीप वहां से कॉलेज पहà¥à¤‚ची। मà¥à¤à¥‡ सà¥à¤§à¥€à¤° पर नजर रखने को कहा और साथ में दो पà¥à¤²à¤¿à¤¸ वालों को à¤à¥€ हिदायत दी। अंकल पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¸à¤¿à¤ªà¤² से मिलने ओफ़िस में चले गये। कà¥à¤› ही समय में अंकल और पà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¸à¤¿à¤ªà¤² सà¥à¤§à¥€à¤° की कà¥à¤²à¤¾à¤¸ के सामने थे। सà¥à¤§à¥€à¤° देखते ही समठगया और खिड़की से कूद कर à¤à¤¾à¤—ने लगा। पर खिड़की के बाहर मà¥à¤à¥‡ देखते ही उसके होश उड गये। उसे हथकड़ी डाल दी गई। समय पर पूरा अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ निपट गया। चारों दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को और पान वाले को हवालात में बंद कर दिया गया। अब चला तलाशी अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ ।
पà¥à¤²à¤¿à¤¸ मेरे साथ सबसे पहले सà¥à¤§à¥€à¤° के यहाठपहà¥à¤‚ची। सà¥à¤§à¥€à¤° à¤à¥€ साथ था। दिवà¥à¤¯à¤¾ और सरोज ने मà¥à¤à¥‡ और सà¥à¤§à¥€à¤° को पà¥à¤²à¤¿à¤¸ के साथ देखा तो घबरा गई।

“साब इसने कà¥à¤› नहीं किया…. जो तो अचà¥à¤›à¤¾ लड़का है….†अंकल ने मेरी तरफ़ देखा।
“कà¥à¤¯à¤¾ बात है जो…. बड़ी तरफ़दारी हो रही है…. ये लो…. अब इसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना वरना साले की थाने में इसकी टांगें तोड दूंगा….†अंकल में मेरी तरफ़ गà¥à¤¸à¥à¤¸à¥‡ में देखा और मà¥à¤à¥‡ सरोज की तरफ़ धकà¥à¤•ा दे दिया।
“जी…. जी…. मैं धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखूंगी….†घबराई सी सरोज मेरा हाथ पकड़ कर खड़ी हो गई।
“साली ….हरामजादी….जो के साथ खड़ी है…. आने तो दे मà¥à¤à¥‡â€¦.तà¥à¤® दोनों मां बेटी के हाथ पांव ना तोड़े तो देखना !â€
मैंने सà¥à¤§à¥€à¤° के कान में कहा….â€à¤¤à¥‚ फ़िकर मत कर यार…. मैं तेरी मां और बहन को रोज़ चोदूंगा…. मसà¥à¤¤ चीज़ें है दोनों….â€
“à¤à¤¡à¤¼à¤µà¥‡â€¦. तेरी तो मैं…. †उसी समय अंकल का à¤à¤• हाथ उसके मà¥à¤à¤¹ पर पड़ा…. उसके होंठो से खून छलक पड़ा। मैंने सà¥à¤§à¥€à¤° की तरफ़ मà¥à¤¸à¥à¤•रा कर देखा…. “तू कà¥à¤¯à¤¾ समà¤à¤¾ था…. कामिनी के साथ तूने जो किया था…. वो चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª बैठती….†अब उसकी नजरें ऊपर उठी…. वो समठचà¥à¤•ा था…. कि ये सब कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हà¥à¤† है…. उसका सर à¤à¤• बार फिर à¤à¥à¤• गया।
“आगे से अगर ये जो…. सà¥à¤§à¥€à¤° के साथ दिखा तो साला जेल जायेगा….†अंकल अपने डायलोग बोले जा रहे थे। सरोज और दिवà¥à¤¯à¤¾ को अब à¤à¥€ कà¥à¤› समठमें नहीं आया। उनकी नजर में बस सà¥à¤§à¥€à¤° à¤à¤• अपराधी था। कामिनी का बदला उन दोनों के समठमें नहीं आया था। इतने में पà¥à¤²à¤¿à¤¸ वाले सारे घर की तलाशी ले कर कà¥à¤› समान ले कर आ गये। उसे वहीं पर सील कर दिया और हम तीनों के उस पर हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करवा लिये।
वो मà¥à¤à¥‡ छोड़ कर आगे तलाशी अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ में निकल गये। मैं अंकल की अदाओं पर मà¥à¤¸à¤•रा उठा। सरोज और दिवà¥à¤¯à¤¾ मà¥à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤¯à¤¾à¤° करके लिपट कर रोने लगे। मैंने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¤à¤¾à¤¯à¤¾
“मैं कोई चोर थोड़े ही हूà¤â€¦. मà¥à¤à¥‡ तो बस इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यहां से निकलते देखा तो पकड़ लिया…. हां सà¥à¤§à¥€à¤° डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ बेचने के चकà¥à¤•र में पकड़ा गया है जाने कितने सालों के लिये अनà¥à¤¦à¤° जायेगा।
उन दोनों ने सà¥à¤§à¥€à¤° से पीछा छूटने पर चैन की सांस ली…. उनकी नजर में मैं पà¥à¤²à¤¿à¤¸ से बच गया और मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤¯à¤¾à¤° से बिसà¥à¤¤à¤° पर सà¥à¤²à¤¾ दिया। दोनों à¤à¤• à¤à¤• करके मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤¯à¤¾à¤° करने लगी…. अचानक मà¥à¤à¥‡ कामिनी का खà¥à¤¯à¤¾à¤² आया।
“मैं शाम को आऊंगा…. रात à¤à¤° मजे करेंगे…. बाय….†मैं सीधा वहां से कामिनी के पास आया। उसे सारी बात बताई…. कामिनी खà¥à¤¶ थी…. उसने मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤¯à¤¾à¤° से चूम लिया….
“बात कहां तक पहà¥à¤‚ची…. कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® चालू है….?†कामिनी और नेहा ने मà¥à¤¸à¥à¤•रा कर पूछाà¥à¥¤
“दोनों ही बहà¥à¤¤ सेकà¥à¤¸à¥€ है…. खूब मजा आता है और अब तो दोनों ही मेरी फ़ेन है…. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जल गई ना….†मैंने शरारत की नजरो से देखा।
दोनों ने मà¥à¤à¥‡ पकड़ लिया और मेरी पिटाई शà¥à¤°à¥‚ कर दी….